
खाकी की छांव में फरेब: दफ्तरों के बाहर सजती थी धोखेबाजी की महफिल,पांच जिले शिकार
जबलपुर। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और नौकरियों के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े का शिकार अक्सर आम लोग और बेरोजगार युवा हो जाते हैं। मध्य प्रदेश के भोपाल, जबलपुर, रीवा, बैतूल और सतना जिलों में एक ऐसा ही बड़ा मामला सामने आया है। यहां की निवासी प्रवीण उर्फ प्रमिला तिवारी ने अपने गिरोह के साथ मिलकर अटल आवास योजना में फ्लैट दिलाने और विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने के बहाने दर्जनों लोगों से लाखों रुपये की ठगी की है। भोपाल की टीटीनगर पुलिस द्वारा 18 जून को प्रमिला की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश हुआ। आरोपियों ने पीडब्ल्यूडी मंत्री के फर्जी हस्ताक्षर वाले नियुक्ति पत्र से लेकर वन विभाग, रेलवे, एसबीआई, एम्स और नगर निगम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के जाली दस्तावेज तैयार कर युवाओं को अपना शिकार बनाया था।
ठगी के जाल में फंसे कई जिलों के बेरोजगार
इस गिरोह ने मध्य प्रदेश के अलग-अलग शहरों में अपना जाल फैला रखा था। रीवा के रहने वाले राकेश दुबे की बेटी को पीडब्ल्यूडी विभाग में नौकरी का झांसा दिया गया और इसके बदले पांच लाख रुपये ले लिए गए। ठगों ने उसे एक नियुक्ति पत्र भी सौंपा, जिस पर पीडब्ल्यूडी मंत्री के फर्जी हस्ताक्षर थे। इसी तरह बैतूल की राधा और सतना के रविशंकर शर्मा को भी अलग-अलग विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी दस्तावेज थमा दिए गए। जबलपुर के दो युवकों हिमांशु और प्रियांशु को भी गिरोह ने अपनी बातों में फंसाकर लाखों रुपये ऐंठ लिए और फर्जी ज्वाइनिंग लेटर दे दिए। भोपाल के नवीन सौंधिया को वन विभाग का जाली नियुक्ति पत्र देकर 1997 बैच का आईएफएस अधिकारी और मुख्य वन संरक्षक दर्शाया गया। वहीं राजीव विश्वकर्मा को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में क्लर्क की नौकरी दिलाने का भरोसा देकर बड़ी रकम हड़प ली गई।
विश्वास जीतने के लिए अपनाया अनूठा तरीका
युवाओं को ठगने के लिए यह गिरोह बेहद शातिर तरीका अपनाता था। प्रमिला और उसके साथी पीड़ितों को सरकारी दफ्तरों के बाहर मिलने के लिए बुलाते थे। वहां पहले से मौजूद गिरोह के अन्य सदस्य खुद को उसी विभाग का कर्मचारी बताते थे, जिससे युवाओं का भरोसा पक्का हो जाता था। करोंद के निवासी राहुल विश्वकर्मा और नवीन सौंधिया से नगर निगम में नौकरी के नाम पर लाखों रुपये वसूले गए। गिरोह ने उनका विश्वास जीतने के लिए उनसे करीब डेढ़ महीने तक फील्ड पर सर्वे का काम भी कराया, ताकि पूरी प्रक्रिया असली लगे। प्रमिला के पास युवाओं के शैक्षणिक दस्तावेज और मोबाइल नंबर पहले से मौजूद थे, जिनका इस्तेमाल वह उन्हें लालच देने के लिए करती थी।
अटल आवास योजना के नाम पर पहली शिकायत
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब कोटरा सुल्तानाबाद के निवासी प्रतीक सोनी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। प्रतीक को प्रमिला ने टीटीनगर में अटल आवास योजना के तहत 22 लाख रुपये का फ्लैट दिलाने का झांसा दिया था। एडवांस के तौर पर प्रमिला ने 1.80 लाख रुपये नकद ले लिए और बदले में रसीदें और आवंटन पत्र भी सौंप दिए। जब प्रतीक ने इन दस्तावेजों की जांच कराई, तो वे पूरी तरह फर्जी पाए गए। इसके बाद पीड़ित ने थाने में मामला दर्ज कराया। टीटीनगर पुलिस ने जब जांच शुरू की, तो धोखाधड़ी के पुख्ता सबूत मिलने पर प्रमिला तिवारी को हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ में एक के बाद एक कई और पीड़ितों के नाम सामने आते गए।
पुरानी घटनाओं और विवादों से जुड़ा नाता
गिरफ्तार महिला प्रमिला तिवारी का विवादों से पुराना नाता रहा है। वह पहले भी एक हाई-प्रोफाइल मामले के कारण चर्चा में आ चुकी है। प्रमिला ने पूर्व में डीएसपी कल्पना रघुवंशी पर अपने घर में घुसकर चोरी करने का आरोप लगाया था, जिसकी काफी चर्चा हुई थी। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश में जुटी है, जो युवाओं को फांसने और फर्जी कागजात तैयार करने का काम करते थे। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ ही ठगी का शिकार हुए कुछ और लोगों के सामने आने की संभावना है।
