
जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में चल रहे कानूनी विवाद में अब नई स्थिति सामने आई है। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने कुलपति के पद पर राजेश कुमार वर्मा की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए नाराजगी जाहिर की है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की पीठ ने स्पष्ट निर्देश देते हुए संबंधित पक्षों को जवाब पेश करने के लिए 4 सप्ताह का अंतिम समय दिया है। इस मामले में याचिकाकर्ता सचिन रजक की ओर से वकील उत्कर्ष अग्रवाल ने दलीलें दीं। आरोप है कि यह नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के विरुद्ध हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग, लोक सेवा आयोग और विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा है, जबकि उच्च शिक्षा विभाग पहले ही अपना पक्ष कोर्ट में रख चुका है। कुलपति पद की नियुक्ति के मामले में आरोपों का सिलसिला काफी गहरा है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि प्रो. राजेश कुमार वर्मा की मूल पद प्राध्यापक के तौर पर हुई नियुक्ति प्रक्रिया में भारी खामियां बरती गई हैं। याचिका में यह मुख्य बिंदु रखा गया है कि यह नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित अनिवार्य शैक्षणिक योग्यताओं और अन्य वैधानिक प्रावधानों के पूरी तरह विपरीत है। इस आधार पर नियुक्ति की कानूनी वैधता पर प्रश्नचिह्न लगाया गया है और कोर्ट से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई है। अभी तक लोक सेवा आयोग, विश्वविद्यालय प्रशासन और स्वयं कुलपति राजेश कुमार वर्मा की ओर से अदालत में अपना जवाब पेश नहीं किया गया है।
लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी कोर्ट
अदालत ने अब इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने साफ कर दिया है कि अब और अधिक देरी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 4 सप्ताह का समय सभी प्रतिवादियों को दिया गया है ताकि वे अपने लिखित जवाब पेश कर सकें। इस अवधि के बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से जुड़े इस विवाद ने शैक्षणिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जब अगले 4 सप्ताह में संबंधित पक्ष अपना जवाब देंगे, तो नियुक्ति की वैधता को लेकर क्या नए तथ्य सामने आते हैं और अदालत अपना अंतिम फैसला किस रूप में सुनाती है।
