
जबलपुर। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के जबलपुर ग्रामीण सर्किल अंतर्गत पाटन में तैनात आउटसोर्स कर्मी धर्मेंद्र मेहरा के साथ 25 जून को दर्दनाक हादसा हो गया। पाटन के कार्यपालन अभियंता कार्यालय में कार्यरत धर्मेंद्र को जूनियर इंजीनियर के निर्देश पर 11 केवी लाइन पर डीओ फ्यूज लगाने का काम दिया गया था। सुबह 11:30 बजे जैसे ही धर्मेंद्र ने डीपी पर चढ़कर फ्यूज लगाने का प्रयास किया, तभी अचानक करंट का जोरदार झटका लगा। बिजली का झटका लगते ही वह 15 फीट की ऊंचाई से नीचे खेत में जा गिरा। सहकर्मियों ने उसे तुरंत जबलपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ वह आईसीयू में जीवन और मौत से जूझ रहा है। डॉक्टर के अनुसार उसके बाएं हाथ में स्पार्क के निशान हैं, रीढ़ की हड्डी में गंभीर फ्रैक्चर है और दाहिने गाल पर भी गहरी चोट आई है।
कंपनी की लापरवाही से जिंदगी हुई संकट में
धर्मेंद्र मेहरा वर्तमान में अपना इलाज निजी खर्च पर कराने को मजबूर है। सबसे दुखद पहलू यह है कि न तो विद्युत वितरण कंपनी और न ही ठेका कंपनी डीए डिजिटल ने अभी तक उसके इलाज के लिए कोई आर्थिक सहायता प्रदान की है। पीड़ित परिवार और सहकर्मी अब प्रबंधन से तत्काल मदद की गुहार लगा रहे हैं ताकि उसका बेहतर इलाज हो सके।
यूनियन ने की प्रबंधन से मुआवजे की मांग
मध्य प्रदेश विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ ने इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। संघ के हरेंद्र श्रीवास्तव, राजकुमार सैनी, मोहन दुबे, दशरथ शर्मा, शशि उपाध्याय, अजय कश्यप, विनोद दास, लखन सिंह राजपूत, इंद्रपाल सिंह, संदीप दीपांकर, आजाद सकवार, जगदीश मेहरा, किशोर और अन्य पदाधिकारी एकजुट हुए हैं। इन सभी ने कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि घायल धर्मेंद्र को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उपचार के लिए राशि उपलब्ध नहीं कराई गई, तो कर्मचारी विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे। असुरक्षित कार्य के कारण हुए इस हादसे ने आउटसोर्स कर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
