

जबलपुर। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड की 660 मेगावाट क्षमता वाली नई सुपरक्रिटिकल इकाई के निर्माण कार्य को अब और अधिक गति दी जा रही है। सारनी स्थित सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में चल रहे इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का निरीक्षण करने के लिए डायरेक्टर कमर्शियल मिलिंद भान्दक्कर पहुंचे। उन्होंने प्रबंध संचालक मनजीत सिंह के निर्देशों के अनुसार निर्माण कार्य की वर्तमान प्रगति को बारीकी से परखा। भान्दक्कर ने साइट पर चल रहे मैकेनिकल और सिविल कार्यों की समीक्षा की और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया कि समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्य पूर्ण किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने वहां तैयार किए गए नवीनीकृत शेड्स का लोकार्पण भी किया ताकि जरूरी दस्तावेजों और उपकरणों को बेहतर तरीके से सुरक्षित रखा जा सके। यह परियोजना राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर जोर
निरीक्षण के दौरान डायरेक्टर कमर्शियल ने भेल स्टोरेज यार्ड, साइट कार्यालय और बैचिंग प्लांट का दौरा किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्माण के दौरान सुरक्षा के मानकों का सख्ती से पालन होना चाहिए। अत्याधुनिक सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित यह यूनिट पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ ही कम संसाधनों में अधिक बिजली पैदा करने में सक्षम होगी। भान्दक्कर ने तकनीकी समन्वय को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए ताकि किसी भी स्तर पर काम न रुके।
आधुनिक सुविधाओं से लैस हुआ परियोजना का कार्यक्षेत्र
परियोजना स्थल पर उपकरणों और रिकॉर्ड के बेहतर रखरखाव के लिए आधुनिक शेड्स तैयार किए गए हैं। इन शेड्स का विधिवत उद्घाटन करते हुए उन्होंने बताया कि इससे प्रतिकूल मौसम में भी जरूरी सामग्रियां सुरक्षित रहेंगी। बेहतर प्रबंधन से कार्य की दक्षता बढ़ेगी और परियोजना अपने लक्ष्य को जल्दी प्राप्त कर सकेगी। यह नवाचार निर्माण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में सहायक साबित होगा।
संसाधनों की उपलब्धता से बढ़ेगी कार्य की गति
समीक्षा बैठक में सभी वरिष्ठ अभियंताओं के साथ संसाधन उपलब्धता और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। डायरेक्टर कमर्शियल ने टीम को आश्वस्त किया कि काम में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए यह यूनिट मील का पत्थर साबित होगी। सभी निर्माण एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के लिए कहा गया है ताकि निर्धारित समय में प्रदेश को इस नई क्षमता का लाभ मिल सके।
