निजी फर्म के 48 करोड़ के टेंडर पर रेलवे में रिश्वतकांड का पर्दाफाश,सीबीआई ने की गिरफ्तारी

Newzo
Newzo - News Editor 6 Views
4 Min Read

नई दिल्ली। राजस्थान के बीकानेर में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रेलवे कंस्ट्रक्शन विभाग के सीनियर सेक्शन इंजीनियर और एक अन्य रेलकर्मी को 1,20,000 रुपए की घूस लेते गिरफ्तार किया। यह पूरा मामला कोलकाता की एमआरटी कंपनी के लगभग 48 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट टेंडर बिलों को पास करने और फाइल आगे बढ़ाने से जुड़ा है। जांच एजेंसी ने शिकायत की पुष्टि के बाद गुरुवार शाम ढोला मारु होटल के समीप स्थित कंस्ट्रक्शन विंग दफ्तर में ट्रैप बिछाया। रिश्वत की रकम हाथ में आते ही टीम ने दोनों को धर दबोचा। इस त्वरित कार्रवाई से पूरे रेल महकमे में भारी खलबली मच गई और जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे रहे। एजेंसी अब फाइलों की सघन जांच कर रही है।

​परियोजना भुगतान के नाम पर रिश्वत की मांग

​कोलकाता स्थित निजी फर्म एमआरटी को बीकानेर क्षेत्र में रेलवे निर्माण से जुड़ा लगभग 48 करोड़ रुपए की लागत का बड़ा ठेका मिला था। कंपनी द्वारा कार्य प्रगति के आधार पर नियमित बिल तैयार कर विभाग को भेजे जा रहे थे। नियमानुसार इन देयकों की तकनीकी जांच और भौतिक सत्यापन के उपरांत भुगतान जारी होना था। लेकिन कंस्ट्रक्शन विंग में तैनात सीनियर सेक्शन इंजीनियर और उनके सहयोगी कर्मचारी ने फाइलों को अटकाए रखा। भुगतान प्रक्रिया को हरी झंडी देने और फाइलों को लेखा शाखा में भेजने के लिए 1,20,000 रुपए की मांग रखी गई थी। ठेका कंपनी के प्रतिनिधि ने इस अनुचित मांग को पूरा करने के बजाय कानून का सहारा लेने का निर्णय लिया।

​कार्यालय में जाल बिछाकर दोनों कार्मिकों को पकड़ा

​कंपनी के प्रतिनिधि ने बीकानेर स्थित केंद्रीय जांच दल से संपर्क साधा और पूरी लिखित शिकायत दर्ज कराई। एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने पहले मामले की गोपनीय छानबीन कर शिकायत को पूरी तरह सही पाया। सत्यापन के तुरंत बाद आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ने की रणनीति तैयार की गई। योजना के अनुसार गुरुवार की शाम ढोला मारु होटल के पास बने निर्माण शाखा के कार्यालय में राशि देने का समय तय हुआ। जैसे ही परिवादी ने सीनियर सेक्शन इंजीनियर और उनके सहयोगी को तय की गई 1,20,000 रुपए की राशि सौंपी, पहले से सतर्क खड़ी टीम ने दबिश देकर दोनों को मौके पर ही पकड़ लिया।

​दस्तावेजों की जांच से बढ़ेगी अधिकारियों की मुश्किलें

​इस अप्रत्याशित छापेमारी से रेलवे के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। विभाग के उच्चाधिकारी इस पूरे प्रकरण पर कुछ भी खुलकर बोलने से बच रहे हैं। मौके से गिरफ्तार किए गए दोनों कर्मचारियों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही 48 करोड़ रुपए के इस पूरे निर्माण टेंडर से जुड़ी मूल पत्रावलियों, मापदंड रजिस्टरों और पिछले बिलों के रिकॉर्ड को कब्जे में ले लिया गया है। जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि रिश्वतखोरी के इस नेटवर्क में अन्य तकनीकी अधिकारियों या लेखा कर्मियों की मिलीभगत तो नहीं थी। आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों पर भी कानून का शिकंजा कस सकता है।

Share This Article
error: This Content is protected !!