भाजपा: मंत्रिमंडल में 55 वर्ष का क्राइटेरिया, कई वरिष्ठ मंत्रियों पर लटकी तलवार

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Newzo - News Editor 3 Views
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जबलपुर। मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार जल्द ही अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने की तैयारी में है। इस बार के संभावित फेरबदल में युवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, क्योंकि पार्टी इस वर्ष को युवा वर्ष के रूप में मना रही है। इस निर्णय से पार्टी के वरिष्ठ मंत्रियों और नेताओं की चिंताएं बढ़ गई हैं, जिन्हें अपनी कुर्सी छिनने का डर सता रहा है। सरकार और संगठन ने मिलकर यह तय किया है कि मंत्रिमंडल में 55 वर्ष की आयु सीमा का पालन किया जाएगा। अभी के मंत्रिमंडल में कई ऐसे नेता शामिल हैं जिनकी उम्र 55 वर्ष से अधिक है। पार्टी की मंशा है कि इस बदलाव के जरिए नई पीढ़ी को तैयार किया जाए, ताकि भविष्य में भी पार्टी का नेतृत्व मजबूत बना रहे। महाकौशल और जबलपुर समेत पूरे प्रदेश में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इस बदलाव की चर्चा के बीच संभावित मंत्री और पद बचाने वाले नेता अपनी दावेदारी पेश करने के लिए दिल्ली के चक्कर लगा रहे हैं। सरकार और संगठन के बीच लगातार मंथन जारी है और जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

​युवाओं को कमान सौंपने की नई कवायद

​पार्टी के इस निर्णय का मुख्य आधार भविष्य की राजनीति को सुरक्षित करना है। भाजपा का मानना है कि जो नेता अभी 55 से 60 वर्ष की आयु सीमा में हैं, वे लंबे समय तक सक्रिय रहकर काम कर सकेंगे और नई टीम को तैयार कर पाएंगे। उम्रदराज नेताओं का एक बड़ा वर्ग अब धीरे-धीरे अपनी सक्रियता खो रहा है, जिसे देखते हुए यह बदलाव आवश्यक हो गया है। वरिष्ठ नेताओं को लग रहा है कि उनके वर्षों के अनुभव को नजरअंदाज किया जा रहा है। वहीं, युवाओं में इस बदलाव को लेकर भारी उत्साह है और उन्हें उम्मीद है कि इस बार मंत्रिमंडल में उनका स्थान पक्का हो सकता है।

​सत्ता- संगठन के बीच मंथन का दौर

​जबलपुर और महाकौशल अंचल में इस समय सबसे ज्यादा राजनीतिक हलचल है। यहां से कई वरिष्ठ नेताओं के पत्ते कटने की चर्चा जोरों पर है, उन्हें मंत्रिमंडल से हटाकर सीधे संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। दूसरी तरफ, जिनकी उम्र सीमा अधिक हो चुकी है, वे दिल्ली पहुंचकर अपना पक्ष रख रहे हैं। उनका तर्क है कि पार्टी के प्रति उनकी वर्षों की निष्ठा को देखते हुए उन्हें बीच सफर में नहीं छोड़ा जाना चाहिए। सरकार और संगठन का शीर्ष नेतृत्व इन सभी पहलुओं पर विचार कर रहा है ताकि कोई भी निर्णय लेते समय पार्टी में असंतोष न फैले और संतुलन बना रहे।

​कुर्सी की दौड़ में शामिल नये चेहरों की उम्मीद

​अब पूरी नजर इस बात पर टिकी है कि मंत्रिमंडल की नई सूची में किन नए चेहरों को शामिल किया जाएगा। नए विधायक पूरी तरह से आशान्वित हैं कि इस बार उनका नंबर निश्चित रूप से लग जाएगा। यह बदलाव केवल मंत्रियों के बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए पार्टी आने वाले 10 से 15 वर्षों के लिए अपना एक मजबूत आधार तैयार करना चाहती है। देखना यह होगा कि संगठन किन नामों पर अपनी मुहर लगाता है और कौन से सीनियर नेता अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब होते हैं।

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