जबलपुर से निकली कृषि क्रांति: छह उत्पादों ने दुनिया में बढ़ाया मान,मिला जीआई टैग

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Newzo - News Editor 17 Views
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बिचौलियों का खेल अब पूरी तरह होगा बंद खत्म

स्थानीय किसानों के लिए खुले निर्यात के नए रास्ते

अब नकली ब्रांडिंग पर होगी सख्त कानूनी कार्यवाही शुरू

जबलपुर। मध्य प्रदेश की कृषि संपदा के लिए 25 और 26 जून 2026 की तारीख अत्यंत गौरवशाली साबित हुईं। जबलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय और किसान कल्याण एवं कृषि विभाग के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश की 4 पारंपरिक किस्मों सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैगानी अरहर और छत्रिय धान को भौगोलिक संकेत यानी जीआई टैग मिला है। इस प्रक्रिया में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रमोद कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में जीआई सेल के प्रधान अन्वेषक डॉ. आशीष कुमार, पूर्व संचालक अनुसंधान डॉ. जीके कौतू और डॉ. एके जैन की टीम ने अहम भूमिका निभाई है। इसी क्रम में जबलपुर के जबलपुरी मटर और जबलपुरी सिंघाड़ा को भी जीआई टैग प्राप्त हुआ है। इसके लिए पाटन स्थित मैकलसुता फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के निदेशक राघवेन्द्र सिंह पटेल, धनंजय पटेल और पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने विशेष सहयोग दिया है।

पारंपरिक फसलों के संरक्षण से बढ़ेगी किसानों की आय

​राज्य की कृषि जैव विविधता को संरक्षित करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। सिताही कुटकी और नागदमन कुटकी अपने उच्च पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए पहचानी जाती हैं। बैगानी अरहर अपनी गुणवत्ता और छत्रिय धान अपनी विशिष्ट सुगंध के लिए प्रसिद्ध है। जीआई टैग मिलने से अब इन फसलों की ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय निर्यात की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। यह उपलब्धि आदिवासी अंचलों की सदियों पुरानी कृषि परंपराओं को नई मजबूती देगी। सरकार अब इन फसलों के प्रसंस्करण पर जोर देगी ताकि स्थानीय किसानों की आय में वृद्धि हो सके। वैज्ञानिक उन्नत तकनीक के प्रयोग और बीज वितरण के लिए कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं ताकि छोटे किसान भी सीधे वैश्विक बाजार से जुड़कर आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकें।

जबलपुर के मटर और सिंघाड़े को मिला कानूनी संरक्षण

​राघवेंद्र सिंह पटेल ने बताया कि जबलपुर के मटर के लिए जनवरी 2024 में आवेदन संख्या 1165 और सिंघाड़े के लिए अक्टूबर 2023 में आवेदन संख्या 1151 के माध्यम से दावा पेश किया गया था। रजिस्ट्री चेन्नई ने इनकी मिठास और गुणवत्ता की गहन जांच के बाद यह मुहर लगाई है। अब इन उत्पादों के लिए यह एक मजबूत कानूनी सुरक्षा कवच बन गया है। कोई भी अन्य व्यापारी अब बाहरी उत्पादों को जबलपुरी बताकर नहीं बेच पाएगा। बिचौलियों के प्रभाव से मुक्ति मिलने के कारण किसानों को अब उनकी उपज का उचित दाम मिलेगा। साथ ही, इससे खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों और कोल्ड स्टोरेज के क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। यह ऐतिहासिक उपलब्धि जबलपुर को विश्व स्तर पर एक प्रमुख कृषि उत्पाद केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।

नर्मदा तट की मिठास को मिली वैश्विक पहचान
​जबलपुर के मटर और सिंघाड़े को जीआई टैग मिलना पूरे भारत में एक अद्वितीय घटना है। मटर के लिए जनवरी 2024 में आवेदन संख्या 1165 और सिंघाड़े के लिए अक्टूबर 2023 में आवेदन संख्या 1151 के माध्यम से दावेदारी पेश की गई थी। जीआई रजिस्ट्री चेन्नई द्वारा इन दोनों उत्पादों के विशिष्ट भौगोलिक और ऐतिहासिक महत्व की गहन जांच की गई, जिसमें सरकार ने इनकी मिठास और गुणवत्ता को बेजोड़ पाया है। अब इन दोनों उत्पादों को एक विशिष्ट भौगोलिक पहचान मिल गई है जो इन्हें अन्य क्षेत्रों के उत्पादों से पूरी तरह अलग करती है। यह सफलता केवल एक प्रमाण पत्र नहीं है, बल्कि जबलपुर की पहचान को विश्व स्तर पर एक विशेष कृषि उत्पाद केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है।
​बिचौलियों से मुक्ति और किसानों को उचित दाम
​जीआई टैग मिलने का सबसे बड़ा लाभ किसानों को उनकी फसलों के उचित मूल्य के रूप में मिलेगा। अब तक किसान बिचौलियों के कारण अपनी उपज का सही दाम पाने से वंचित रह जाते थे, लेकिन प्रमाणिकता की आधिकारिक मुहर लगने के बाद अब देश और विदेश के बड़े व्यापारी इन उत्पादों को खरीदने में अधिक रुचि दिखाएंगे। खरीदारों की संख्या बढ़ने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों को उनकी उपज की मनचाही कीमत प्राप्त होगी, जिससे बिचौलियों का प्रभाव समाप्त हो जाएगा और किसान सीधे तौर पर आत्मनिर्भर बनेंगे। यह आर्थिक बदलाव न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार लाएगा, बल्कि कृषि को एक अधिक लाभकारी और सम्मानित व्यवसाय बनाने की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा।
​कानूनी संरक्षण से नकली ब्रांडिंग पर पूर्ण रोक
​जीआई टैग एक मजबूत कानूनी सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करेगा। अभी तक यह देखा जाता था कि बाहरी क्षेत्रों के सामान्य मटर या सिंघाड़े को भी जबलपुरी बताकर महंगे दामों पर बेचा जाता था, जिससे जबलपुर के असली उत्पादों की साख पर बुरा असर पड़ता था। अब इस टैग के बाद कोई भी अन्य व्यापारी अनधिकृत रूप से अपने उत्पाद को जबलपुरी मटर या जबलपुरी सिंघाड़ा नहीं कह पाएगा और ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई होगी। यह सुरक्षा किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए एक बड़ा भरोसा है, क्योंकि अब ग्राहकों को वास्तविक और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिलेंगे। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात के नए द्वार खुलने से स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों और कोल्ड स्टोरेज की बड़ी चेन विकसित होगी, जिससे जबलपुर के युवाओं को रोजगार के बेहतरीन अवसर मिलेंगे।

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