
जबलपुर। जबलपुर और रीवा जिलों में ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की मिलीभगत से हुए करोड़ों रुपए के डामर घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा दर्ज मामलों को संज्ञान में लेकर केंद्रीय जांच एजेंसी ने कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान 23.50 लाख रुपए नकद बरामद किए गए और विभिन्न बैंक खातों में जमा 2.93 करोड़ रुपए फ्रीज कर दिए गए। जांच में मुख्य आरोपी अखिलेश मेहता, उनकी फर्म मेसर्स विश्वकुसुम इन्फ्राटेक और मेहता पेट्रोल पंप सामने आए हैं। इन पर इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के नाम पर 55.60 करोड़ रुपए के फर्जी इनवॉइस बनाकर सरकारी खजाना हड़पने का आरोप है, जिसमें 12 करोड़ रुपए से अधिक के फर्जी बिल अकेले मेहता की फर्म के हैं।
भ्रष्ट गठजोड़ ने निगला सड़कों का बजट
इस पूरे खेल में ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों के विकास के लिए आने वाली राशि को अफसरों और ठेकेदारों ने मिलकर ठिकाने लगा दिया। लोक निर्माण और ग्रामीण विकास की योजनाओं को नुकसान पहुंचाते हुए कागजों पर ही डामर की फर्जी खरीद और आपूर्ति दिखा दी गई। वास्तविक रूप से निर्माण स्थल पर कोई सामग्री नहीं पहुंची, बल्कि सरकारी खजाने का पैसा आपस में बांट लिया गया।
दिग्गज तेल कंपनियों के नकली दस्तावेज तैयार
जालसाजों ने देश की प्रमुख सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों को भी इस धोखाधड़ी का जरिया बना लिया। विभाग के सामने भुगतान का दावा करने के लिए इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के नाम का इस्तेमाल किया गया। इन कंपनियों के फर्जी इनवॉइस और नकली बिल तैयार कर विभाग में असली के तौर पर पेश किए गए और बड़ी रकम निकाल ली गई।
डिजिटल साक्ष्यों से खुलेगा बेनामी लेनदेन
छापेमारी के दौरान जांच दल को आरोपियों के ठिकानों से संपत्तियों के दस्तावेज, बेनामी वित्तीय लेनदेन की डायरियां और मोबाइल-लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले हैं। केंद्रीय एजेंसी ने इन सभी डिजिटल उपकरणों को जब्त कर लिया है। आने वाले दिनों में इनकी फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि इस पूरे सिंडिकेट और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पर्दाफाश हो सके।
मुख्य आरोपी की वित्तीय कमान पर शिकंजा
घोटाले की इस जांच का मुख्य केंद्र जबलपुर का मेहता पेट्रोल पंप और मेसर्स विश्वकुसुम इन्फ्राटेक फर्म बनी हुई है। इस फर्म के संचालक अखिलेश मेहता के दफ्तर और पूरे वित्तीय रिकॉर्ड की सघन जांच की जा चुकी है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की प्राथमिक जांच के बाद अब ईडी ने इस पूरे नेटवर्क को खंगालना शुरू कर दिया है।
