भाजयुमो अध्यक्ष की दौड़ :आपराधिक रिकॉर्ड और गुटबाजी ने बिगाड़ दिया खेल

Newzo
Newzo - News Editor 39 Views
4 Min Read

जबलपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा के ग्रामीण और शहर अध्यक्ष की घोषणा का मामला पूरी तरह अटक गया है। सत्ता में आने के बाद संगठन के भीतर अनुशासन की दीवारें ढहती नजर आ रही हैं और गुटों के बीच अंदरूनी खींचतान चरम पर पहुंच गई है। दोनों क्षेत्रों के लिए दावेदारों की सूची बेहद लंबी है, लेकिन सबसे ऊपर सिर्फ बड़े भाजपा नेताओं के पुत्रों और उनके परिजनों के नाम चल रहे हैं। बीच में कुछ नाम फाइनल होने की चर्चा थी, लेकिन तभी दावेदारों के आपराधिक रिकॉर्ड और आपसी शिकायतों का पुलिंदा संगठन के शीर्ष नेतृत्व के पास पहुंच गया। इसके बाद से ही पूरी चयन प्रक्रिया रुक गई है। इस रस्साकशी के कारण जमीन पर काम करने वाले आम युवाओं को अपना नेतृत्व और प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है।

सत्ता का असर, जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा

​भाजपा के सत्ता में रहने के कारण अब संगठन के इन छोटे पदों के लिए भी भारी मारामारी देखने को मिल रही है। जब पार्टी सत्ता से बाहर थी, तब पदों के लिए ऐसी स्थिति नहीं बनती थी, लेकिन अब सत्ता सुख के कारण मगजमारी बहुत बढ़ गई है। संगठन के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी चाहते हैं कि रात-दिन खून-पसीना बहाने वाले वास्तविक कार्यकर्ताओं को यह जिम्मेदारी मिले। वहीं दूसरी तरफ जिले के 2 बड़े क्षत्रप इस कुर्सी पर अपने पसंदीदा चेहरों को बैठाने के लिए अड़े हुए हैं। इन दिग्गजों ने इस नियुक्ति को अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है, जिससे आम कार्यकर्ताओं में घोर निराशा का माहौल व्याप्त है।

शिकायतों और आपराधिक रिकॉर्ड के पेंच में फंसी नियुक्तियां

​अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल कई चेहरों के पुराने रिकॉर्ड और उनकी राजनीतिक गतिविधियों की गोपनीय रिपोर्ट संगठन के पास भेजी गई है। गुटीय राजनीति के चलते एक-दूसरे को पटखनी देने के लिए जमकर गुप्त शिकायतें की गईं। आपराधिक छवि और अनैतिक कार्यों में संलिप्तता के दस्तावेज सामने आने के बाद प्रदेश नेतृत्व भी असमंजस में पड़ गया है। इसी कारण ऐन वक्त पर तैयार हो चुकी सूची को ठंडे बस्ते में डालना पड़ा। अब संगठन के रणनीतिकार ऐसा रास्ता तलाश रहे हैं जिससे दोनों बड़े नेताओं का अहंकार भी संतुष्ट हो जाए और विवाद भी बाहर न आए।

नेतृत्व विहीन युवा वर्ग की राजनीतिक चुनौतियां

​इस पूरे घटनाक्रम से जबलपुर का आम युवा वर्ग खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। गुटबाजी के इस दौर में असली मुद्दों से ध्यान भटक गया है और केवल भाई-भतीजावाद को बढ़ावा मिल रहा है। 2 गुटों की इस लड़ाई के कारण युवा मोर्चा का ढांचा पूरी तरह निष्क्रिय पड़ा है। जब तक शीर्ष नेतृत्व इस गतिरोध को तोड़ने के लिए कोई कड़ा फैसला नहीं लेता, तब तक यह अंदरूनी कलह शांत होने वाली नहीं है। अब देखना होगा कि संगठन अपने पुराने अनुशासन को वापस लाता है या फिर रसूखदार नेताओं के दबाव के आगे आत्मसमर्पण करता है।

Share This Article
error: This Content is protected !!