
जबलपुर। मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने रिश्वतखोरी के आरोपों में घिरे दो अधिकारियों पर कड़ा एक्शन लिया है। जबलपुर स्थित कंपनी मुख्यालय में ईओडब्ल्यू द्वारा 29 जून 2026 को ट्रैप कार्रवाई करते हुए अतिरिक्त मुख्य अभियंता सिविल प्रहलाद मर्सकोले और कार्यपालन अभियंता सिविल चंद्रशेखर मेहरा को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था। यह पूरा मामला निर्माण कार्य के 10 लाख रुपये के बिल भुगतान के एवज में की गई अवैध वसूली से जुड़ा है। घटना के बाद कंपनी प्रबंधन ने तत्काल प्रभाव से दोनों अधिकारियों का चालू प्रभार निरस्त कर दिया है और प्रशासनिक आधार पर उनका तबादला कर दिया है। प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और दोषी पाए जाने पर भविष्य में भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।
आरोपी अधिकारियों को कहां भेजा गया
कंपनी के आधिकारिक आदेश के अनुसार अतिरिक्त मुख्य अभियंता प्रहलाद मर्सकोले को उनके वर्तमान पद से हटाकर कार्यालय कार्यपालन अभियंता सिविल संभाग रीवा में पदस्थ कर दिया गया है। वहीं कार्यपालन अभियंता चंद्रशेखर मेहरा को उनके प्रभार से मुक्त करते हुए सहायक अभियंता सिविल कार्यालय अधीक्षण अभियंता सिविल शहडोल स्थानांतरित कर दिया गया है। दोनों अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे बिना देरी किए अपने नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करें। कंपनी ने इन स्थानांतरणों के माध्यम से यह संकेत दिया है कि कार्यशैली में पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे ऊपर है।
कम्पनी का संदेश,जारी रहेगी कार्रवाई
इस घटना ने बिजली कंपनी के भीतर प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। ईओडब्ल्यू की टीम ने शिकायत का सत्यापन करने के बाद जाल बिछाया था जिसमें दोनों अधिकारी फंस गए थे। कंपनी के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि रिश्वतखोरी जैसी घटनाओं से संस्थान की छवि धूमिल होती है जिसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रबंधन का मानना है कि इस तरह की त्वरित कार्रवाई से अन्य कर्मचारियों में भी कड़ा संदेश जाएगा कि भ्रष्टाचार का रास्ता अपनाने वालों के लिए कंपनी में कोई जगह नहीं है। भविष्य में भी विभाग इस दिशा में सजग रहेगा ताकि कार्यप्रणाली पूरी तरह से भ्रष्टाचार मुक्त बनी रहे।
