
डिंडौरी। अतिथि शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष इमरान मलिक के नेतृत्व में शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम नायब तहसीलदार ब्रजभान सिंह को ज्ञापन सौंपा। पिछले 18 वर्षों से अल्प मानदेय पर दूरदराज के क्षेत्रों में 70 से 80 किलोमीटर का सफर तय कर पढ़ाने वाले ये शिक्षक अब अपने हक के लिए लामबंद हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की गई पुरानी घोषणाओं को शीघ्र लागू करने की अपील की। संघ का स्पष्ट कहना है कि विधानसभा में मिले सकारात्मक आश्वासनों पर त्वरित अमल करते हुए प्रदेश सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित करे। शिक्षकों ने प्रशासन को चेताया कि वर्षों के समर्पण के बाद अब वे स्थायी समाधान चाहते हैं।
विभागीय परीक्षा कराकर सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करे सरकार
ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षण कार्य संभाल रहे कर्मियों का कहना है कि उनकी योग्यता को नजरअंदाज किया जा रहा है। बीएड और डीएड उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के लिए शिक्षा विभाग को एक स्वतंत्र विभागीय परीक्षा आयोजित करनी चाहिए। इस विशेष परीक्षा के जरिए योग्य शिक्षकों को सीधे नियमित पदों पर पदस्थ किया जा सकता है। वर्तमान में प्रचलित खुली भर्तियों पर रोक लगाने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई है। जब तक पहले से कार्यरत अनुभवी शिक्षकों का पूरा समायोजन नहीं हो जाता, तब तक बाहरी चयन प्रक्रियाएं उनके हितों पर कुठाराघात करती हैं। कई शिक्षक अपनी आयु के उस पड़ाव पर पहुंच चुके हैं जहां नई सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठना संभव नहीं है।
12 महीने का दोगुना भुगतान अनिवार्य किया जाए
आर्थिक असुरक्षा को लेकर शिक्षकों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था से बुनियादी घरेलू खर्चे भी पूरे नहीं हो पाते। ग्रीष्मकालीन अवकाश सहित पूरे 12 महीने का वेतन देने और मौजूदा राशि को दोगुना करने का प्रावधान अनिवार्य होना चाहिए। इसके अलावा सेवानिवृत्ति आयु सीमा 62 वर्ष तक सेवा निरंतरता का सुरक्षा चक्र दिया जाए। शिक्षकों का स्पष्ट मत है कि नीतिगत निर्णय लेने से मध्य प्रदेश भर के लाखों आश्रित परिवारों को संबल मिलेगा। वर्षों से लंबित इन मांगों का निपटारा होने से शैक्षणिक व्यवस्था में भी स्थिरता आएगी और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को निरंतर अनुभवी मार्गदर्शन मिल सकेगा।
