
फर्जी आईएसबीएन और फीस बढ़ोतरी मामले में सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने दिया आदेश
जबलपुर। सुप्रीम कोर्ट ने जबलपुर के प्रतिष्ठित क्राइस्ट चर्च स्कूल के चार शिक्षकों के खिलाफ निचली अदालत में चल रहे आपराधिक ट्रायल पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। शिक्षकों पर कथित रूप से फर्जी आईएसबीएन वाली किताबें बेचने और अवैध रूप से स्कूल फीस बढ़ाने के षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप लगाकर मामला दर्ज किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस महादेवन की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए यह स्थगन आदेश पारित किया। प्रकरण की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता शिक्षकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा, वरुण तन्खा और हर्षित बारी ने पैरवी की। अधिवक्ताओं ने अदालत को अवगत कराया कि क्राइस्ट चर्च स्कूल के शिक्षक अतुल, अनुपम, अब्राहम और एकता पीटर के खिलाफ वर्ष 2024 से फर्जी आईएसबीएन वाली किताबें चलाने और फीस बढ़ाने की साजिश रचने का आपराधिक प्रकरण चलाया जा रहा है।
कोर्ट के समक्ष क्या दलील दी गयी
वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष यह गंभीर सवाल उठाया कि पूरे मामले में प्रबंधन की भूमिका की निष्पक्ष जांच किए बिना केवल अध्यापन कार्य कराने वाले शिक्षकों को ही क्यों निशाना बनाकर गिरफ्तार किया गया। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अधिकांशतः एक विशेष वर्ग द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षकों को ही इस प्रकरण में घसीटा गया है, जो जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। अदालत द्वारा पूछे जाने पर राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में कोई ठोस और संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
इससे पूर्व याचिकाकर्ता शिक्षकों ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरण और ट्रायल को निरस्त कराने के लिए मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चारों शिक्षकों के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में चल रही सभी कार्यवाहियों पर अंतरिम रोक लगा दी, जिससे शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है।
