
ज़बलपुर। जबलपुर नगर निगम में स्वच्छता व्यवस्था संभालने वाली आउटसोर्स एजेंसी अल्ट्रा क्लीन कंपनी एक बार फिर बड़े विवादों में घिर गई है। अधिवक्ता धर्मराज सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक औपचारिक शिकायत भेजकर कंपनी पर कर्मचारियों के शोषण और वेतन भुगतान में भारी अनियमितता का आरोप लगाया है। इस गंभीर मामले की जानकारी नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और मुख्य सचिव अनुराग जैन को भी दी गई है। शिकायत में दावा किया गया है कि नगर निगम प्रशासन और महापौर कार्यालय में बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अधिवक्ता ने कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे और महाप्रबंधक विकास रजक पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
कंपनी की मनमानी से कर्मचारियों का हो रहा शोषण
शिकायतकर्ता अधिवक्ता धर्मराज सिंह का आरोप है कि अल्ट्रा क्लीन कंपनी द्वारा लंबे समय से नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। कंपनी प्रबंधन पर कर्मचारियों के वेतन का समय पर भुगतान न करने और निर्धारित वेतन में कटौती करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इसके साथ ही, सार्वजनिक सड़कों पर सरकारी दस्तावेज लावारिस हालत में मिलने का दावा भी किया गया है, जो कंपनी की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है। शिकायत में साफ तौर पर कहा गया है कि कंपनी की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण सफाई व्यवस्था के नाम पर जनता के पैसों का दुरुपयोग किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन की चुप्पी ने इस मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है, जिससे कर्मचारियों में काफी आक्रोश व्याप्त है।
सात दिन में कार्रवाई नहीं तो हाईकोर्ट जाएंगे
अधिवक्ता धर्मराज सिंह ने नगर निगम आयुक्त को कड़ा विधिक नोटिस जारी करते हुए 7 दिन का समय दिया है। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर उस पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में ले जाया जाएगा। इस प्रस्तावित याचिका में नगर निगम प्रशासन और संबंधित कंपनी को मुख्य पक्षकार बनाया जाएगा। शिकायतकर्ता की मांग है कि भविष्य में इस कंपनी को नगर निगम का कोई भी नया ठेका नहीं दिया जाना चाहिए। यह अल्टीमेटम नगर निगम प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि यदि हाईकोर्ट में मामला जाता है तो अधिकारियों की जवाबदेही तय होना निश्चित है।
प्रशासनिक मिलीभगत से कंपनी को मिल रहा संरक्षण
पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा नगर निगम प्रशासन की भूमिका को लेकर है। आरोप है कि बार-बार शिकायतें मिलने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। आम जनता का मानना है कि इतनी बड़ी अनियमितताओं के बाद भी कंपनी पर कार्रवाई न होना मिलीभगत की ओर इशारा करता है। सफाई कर्मचारियों ने भी दबी जुबान से अपनी समस्याओं को बयां किया है। अब मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप की मांग के बाद इस मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद बढ़ गई है। यदि यह जांच सही दिशा में आगे बढ़ती है, तो शहर की सफाई व्यवस्था और आउटसोर्सिंग के नाम पर चल रहे खेल का पर्दाफाश होना तय है।
