
कैंट बोर्ड के सार्वजनिक बाजारों में शुरू होगी कोटा प्रणाली
छावनी की दुकानों में पूर्व सैनिकों को मिला बड़ा हक
जबलपुर। कैंट बोर्ड प्रशासन ने रक्षा मंत्रालय के नए निर्देशों के बाद अपने सार्वजनिक बाजारों की दुकानों को लेकर एक बिल्कुल अलग व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके क्रियान्वयन के लिए आम जनता से आपत्तियां मांगी गई हैं। केंद्र सरकार ने कैंट एक्ट 2006 की धारा 346 की उपधारा 2 के खंड ड के साथ पठित धारा 267 का उपयोग करते हुए 10 जून 2026 को छावनी बोर्ड सार्वजनिक बाजार दुकान आरक्षण प्रारूप नियम 2026 की घोषणा की है। इस बिल्कुल नई नीति के तहत कुल दुकानों का 25 फीसदी हिस्सा थल सेना, नौसेना और वायुसेना के सेवानिवृत्त जवानों तथा शहीद सैनिकों की पत्नियों के लिए पूरी तरह रिजर्व रहेगा। इस बड़े जमीनी बदलाव से छावनी क्षेत्र के पुराने दुकानदारों और व्यावसायिक हलकों में एक नई हलचल पैदा हो गई है।
अंतिम छोर के परिवारों को मिलेगा सशक्त व्यापारिक आधार
इस नए मसौदे के तहत आरक्षित कोटे के अलावा बची हुई 75 फीसदी दुकानों को आवंटित करने के लिए स्थानीय नगर निगम या समीपवर्ती नगर निकायों के मौजूदा नियमों को आधार बनाया जाएगा। कैंट बोर्ड की आय का मुख्य स्रोत इन सार्वजनिक बाजारों से मिलने वाला मासिक किराया और तहबाजारी ही है। व्यापारियों के बीच इस बात को लेकर संशय बना हुआ था कि क्या मौजूदा दुकानों को भी खाली कराया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस शंका को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि वर्तमान में संचालित दुकानों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा और यह नियम केवल भविष्य में निर्मित होने वाली या खाली होने वाली नई दुकानों पर ही लागू किया जाएगा।
दोबारा विज्ञापन जारी होने के बाद बदलेगी दुकान की श्रेणी
सुरक्षा बलों के आश्रितों के लिए आरक्षित दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी। यदि निर्धारित कोटे के तहत पहली बार में पर्याप्त संख्या में पात्र लोग आवेदन नहीं करते हैं, तो बोर्ड प्रशासन इस प्रक्रिया को बंद नहीं करेगा। नियमों के मुताबिक ऐसी आरक्षित दुकानों को सामान्य वर्ग में तब्दील करने से पहले कम से कम 2 बार विशेष रूप से विज्ञापन जारी कर आवेदन बुलाने होंगे। जब दोनों बार की कोशिशों के बाद भी कोई योग्य आवेदक नहीं मिलेगा, तब जाकर उस दुकान को ओपन कैटेगरी में डाला जाएगा ताकि आम व्यापारी खुली बोली में हिस्सा ले सकें।
एक महीने की तय मियाद में देना होगा सुझाव
इस बड़े नीतिगत बदलाव को लेकर बोर्ड प्रबंधन ने 18 जून को एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर दिया है। इस नोटिस के माध्यम से छावनी क्षेत्र के निवासियों और दुकानदारों को अपनी राय रखने की पूरी आजादी दी गई है। यदि किसी नागरिक को इस नए आरक्षण नियम से कोई समस्या है, तो वह सूचना प्रकाशन के 30 दिनों के भीतर अपनी लिखित आपत्ति छावनी कार्यालय में जमा कर सकता है। इस निर्धारित अवधि के बाद प्राप्त होने वाले किसी भी आवेदन पर विचार नहीं होगा और इसके बाद इस नियम को स्थाई रूप से लागू कर दिया जाएगा।
