
जबलपुर। मध्य प्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़े प्रशासनिक फेरबदल को अंजाम दिया है जिसके तहत तीन उच्च अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है। विभाग की उप सचिव मंजूषा विक्रांत राय ने 12 जुलाई 2026 को इस संबंध में विधिवत आदेश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल में पदस्थ कृष्णकांत द्विवेदी और ओंकार लाल मण्डलोई के साथ ही राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान सीमेट भोपाल के संचालक दिनेश सिंह कुशवाहा को नई जिम्मेदारी दी गई है। इन अधिकारियों को संचालक के पद पर पदोन्नत किया गया है। इस आदेश के बाद विभाग में हलचल मच गई है जिसका असर अगले कुछ दिनों में दिखाई दे सकता है।
प्रमोशन के साथ परीवीक्षा की शर्त
राज्य शासन द्वारा जारी इन आदेशों के तहत पदोन्नति पाने वाले सभी अधिकारियों को मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 1961 के अंतर्गत 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि अनिवार्य रूप से पूर्ण करनी होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आरक्षण अधिनियम 1994 क्रमांक 21 सन् 1994 और मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के सभी प्रावधानों का कड़ाई से पालन किया गया है। वेतन निर्धारण के लिए इन अधिकारियों को आदेश प्राप्ति की तिथि से 1 माह के भीतर अपना विकल्प प्रस्तुत करना होगा। यह पूरी प्रक्रिया नियम 13 के दायरे में रहकर संपन्न की जाएगी। पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से नई पदस्थापना प्रभावी मानी जाएगी।
कानूनी प्रक्रिया के अधीन रहेंगे नियुक्ति आदेश
शासन द्वारा जारी इस आदेश में एक विशेष कानूनी शर्त भी जोड़ दी गई है। सभी पदोन्नतियां माननीय सर्वोच्च न्यायालय में लंबित विशेष अनुमति याचिका क्रमांक 13954/2016 के अंतिम परिणाम के अधीन रहेंगी। भविष्य में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा इस मामले में जो भी निर्णय या दिशा निर्देश दिए जाएंगे, वे इन पदोन्नतियों पर पूरी तरह लागू होंगे। विभाग ने इस पूरे मामले में कानूनी पहलुओं का विशेष ध्यान रखा है। मध्य प्रदेश के राज्यपाल के नाम से और उनके आदेशानुसार यह प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। इस कदम से विभाग के उच्च स्तरीय प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिला है और आगे की कार्यवाही न्यायालय के फैसलों पर निर्भर करेगी।
