
कृषि मंत्री शिवराज सिंह को किसान संघ का पत्र, विदेशी कंपनियों के दबाव से मुक्त हो भारतीय खेती, बीटी कपास की विफलता से संकट में आए किसान
जबलपुर। नई दिल्ली में भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने पत्रकारवार्ता के दौरान देश में कपास उत्पादन में आ रही गिरावट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस संकट का मुख्य कारण बीटी कपास को बताते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है। मिश्र का कहना है कि जीएम फसलों के पक्षकारों द्वारा फैलाए जा रहे गलत नैरेटिव के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। बीटी कपास पिंक बोलवार्म कीड़े को रोकने में पूरी तरह विफल रहा है, जिसके चलते देश की पारंपरिक देसी प्रजातियां समाप्त हो गईं और कुल उपज घट गई। इस दौरान कपास उत्पादन बढ़ाने की तकनीक खोजने वाले पद्मश्री सम्मानित श्रीरंग देउबा लाड उर्फ दादा लाड ने भी किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी बीजों और विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
जीएम तकनीक से पारंपरिक खेती को हुआ बड़ा नुकसान
भारतीय किसान संघ का मानना है कि बीटी कपास कभी भी अधिक उपजाऊ नहीं था। विदेशी कंपनियों के प्रभाव और दबाव के कारण देश की कृषि व्यवस्था में रसायनों का अंधाधुंध इस्तेमाल बढ़ा है, जिससे कृषि उत्पाद जहरीले हो रहे हैं। ग्लाइफोसेट और पैराकाट डाइक्लोराइड जैसे खतरनाक रसायनों के बढ़ते प्रयोग के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारी अब महामारी का रूप लेती जा रही है, जो जनसामान्य के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है। इस संकट से बाहर निकलने का एकमात्र उपाय देश की पुरानी और उच्च उपज देने वाली देसी किस्मों को फिर से अपनाना है।
पद्मश्री दादा लाड ने स्वदेशी प्रशिक्षण का प्रस्ताव दिया
कपास का उत्पादन बढ़ाने की विशेष तकनीक विकसित करने वाले पद्मश्री श्रीरंग देउबा लाड ने सरकार के सामने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। दादा लाड ने स्पष्ट किया कि देश के कपास उत्पादक किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जीएम बीजों की नहीं, बल्कि उन्नत देसी बीजों और सही तकनीकी प्रशिक्षण की जरूरत है। उन्होंने आईसीएआर द्वारा प्रमाणित अपनी तकनीक का देशव्यापी प्रशिक्षण देने के लिए स्वेच्छा से तैयारी जताई है और सरकार से आग्रह किया है कि इस तकनीक को आम किसानों तक पहुंचाने में पूरा सहयोग दिया जाए।
किसान संघ ने उठाई सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग
संगठन ने कृषि क्षेत्र की बेहतरी के लिए सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग के तहत बीटी कपास की किस्मों बीजी-1 और बीजी-2 को तत्काल प्रभाव से डी-नोटीफाई करने की अपील की गई है। दूसरी मांग में देश के भीतर सभी प्रकार की जीएम फसलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। इसके साथ ही, बीटी कपास के पक्ष में भ्रामक और गलत नैरेटिव तैयार कर देश के भोले-भाले किसानों को गुमराह करने वाले तत्वों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच कर सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई है।
