
जबलपुर। जबलपुर रेल मंडल में हुए 40 लाख रुपए के फर्जी मेडिकल क्लेम घोटाले ने पूरे विभाग को हिलाकर रख दिया है। अब तक 10 कर्मचारियों के निलंबन से शुरू हुई यह कार्रवाई एक बहुत बड़े और गहरे रैकेट की ओर इशारा कर रही है। रेलवे के विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि यह फर्जीवाड़ा केवल कुछ निचले स्तर के कर्मचारियों के बूते संभव नहीं था। इसके पीछे एक लंबा और संगठित नेटवर्क काम कर रहा है, जिसमें विभाग के कई बड़े अधिकारियों की संलिप्तता की प्रबल संभावना है। विजिलेंस विभाग की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं, जो यह संकेत दे रहे हैं कि इस घोटाले की जड़ें काफी गहरी हैं और जल्द ही इसमें कई बड़े पदों पर बैठे अधिकारियों के नाम सामने आने वाले हैं।
बड़े अधिकारियों की भूमिका की हो रही जांच
विजिलेंस की टीम अब इस बिंदु पर ध्यान केंद्रित कर रही है कि आखिर इतने बड़े फर्जीवाड़े को लंबे समय तक कैसे छुपाया गया। बिना उच्च पदस्थ अधिकारियों की मंजूरी और मिलीभगत के इतनी बड़ी राशि का भुगतान निजी अस्पतालों के नाम पर होना असंभव प्रतीत होता है। सूत्रों के अनुसार, लेखा विभाग के निलंबित कर्मचारियों के अलावा उन वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में है, जिनके पास इन बिलों को अंतिम रूप से स्वीकृत करने का अधिकार था। जांच एजेंसियां उन सभी दस्तावेजों को बारीकी से खंगाल रही हैं, जिन पर अधिकारियों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। यह स्पष्ट है कि इस पूरे खेल में शामिल नेटवर्क को ऊपर से संरक्षण प्राप्त था, जिसे तोड़ने के लिए विभाग अब कड़े कदम उठा रहा है।
संगठित नेटवर्क का जाल बहुत लंबा फैला
इस फर्जीवाड़े का दायरा केवल जबलपुर मंडल तक सीमित नहीं लग रहा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क का जाल बहुत लंबा है, जिसमें निजी अस्पतालों और कुछ बिचौलियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। रेलवे अब उन अस्पतालों के रिकॉर्ड को भी सत्यापित कर रहा है, जिनके नाम पर बिल लगाकर भुगतान लिए गए। यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है, जहां कागजों पर बीमारी का हवाला देकर सरकारी धन को निजी जेबों में डाला गया। रेलवे प्रशासन इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या यह नेटवर्क केवल जबलपुर तक ही था या अन्य मंडलों में भी इसी तरह का खेल चल रहा है। विजिलेंस की रिपोर्ट के बाद इस नेटवर्क से जुड़े कई और लोगों की गिरफ्तारी और निलंबन तय माना जा रहा है।
जल्द सामने आएंगे चौंकाने वाले बड़े नाम
रेलवे के अंदरूनी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि अभी जो 10 लोग निलंबित हुए हैं, वे तो केवल इस पूरे घोटाले के छोटे से हिस्से मात्र हैं। जैसे-जैसे विजिलेंस जांच की प्रक्रिया अपनी अंतिम रिपोर्ट की ओर बढ़ेगी, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले बड़े नाम उजागर होंगे। रेलवे प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी रसूखदार अधिकारी क्यों न हो। आने वाले कुछ दिनों में इस मामले में बड़ी प्रशासनिक हलचल देखने को मिल सकती है, जिससे कई बड़े अधिकारियों की कुर्सी छिनना तय है। वर्तमान में पूरा रेल मंडल इस जांच के साये में है और हर स्तर पर फाइलों की दोबारा समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी धांधली को पूरी तरह से रोका जा सके।
