
जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए पॉक्सो अधिनियम के मामले में मुकेश पंड्रो को दोषमुक्त कर दिया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की पीठ ने आपराधिक अपील 827/2026 की सुनवाई करते हुए निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया। डिंडौरी के विशेष न्यायाधीश ने 27.11.2025 को मुकेश को दोषी मानते हुए 5 वर्ष और 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। उच्च न्यायालय में अपीलकर्ता के अधिवक्ताओं शीर्ष अग्रवाल और शिवम कछावाहा ने तर्क दिया कि पीड़िता वयस्क थी और अपनी मर्जी से साथ गई थी। न्यायालय ने रिकॉर्ड में आयु को लेकर विसंगति पाई और माना कि अभियोजन पक्ष घटना के समय पीड़िता को नाबालिग साबित करने में असफल रहा। राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता मानस मणि वर्मा मौजूद रहे।
आयु निर्धारण में अभियोजन पक्ष रहा पूरी तरह विफल
अदालत ने पाया कि पीड़िता की जन्मतिथि को लेकर पेश किए गए दस्तावेजों में विरोधाभास था। जन्म प्रमाण पत्र घटना के 11 वर्ष बाद 2018 में बनवाया गया था। इसके विपरीत अभियोजन की गवाह पीड़िता की माता ने अपने बयान में स्वीकार किया था कि उसने पीड़िता को पहली कक्षा में 7 से 8 वर्ष की उम्र में दाखिला दिलाया था। इस आधार पर अदालत ने गणना की तो घटना के समय पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से अधिक पाई गई। डी.एन.ए. रिपोर्ट में भी अपीलकर्ता के पक्ष में सकारात्मक तथ्य सामने आए थे। अदालत ने सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद निचली अदालत के दोषसिद्धि के आदेश को विधि विरुद्ध मानते हुए खारिज कर दिया और अपीलकर्ता को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
