
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने सिवनी पुलिस लाइन में पदस्थ एएसआई भारती चौबे को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने भारती चौबे के निलंबन आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है। याचिकाकर्ता पर आरोप था कि रक्षित केंद्र सिवनी में पदस्थ रहने के दौरान उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया और एक पीड़िता को शासकीय आवास पर बुलाकर किसी व्यक्ति से शादी करने के लिए दबाव बनाया या मध्यस्थता की, जो सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन माना गया। इस मामले में 9 फरवरी 2026 को निलंबन की कार्रवाई की गई थी। हाईकोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया का पालन न होने और अपील के विकल्प को देखते हुए निलंबन पर रोक लगाते हुए मामले के निपटारे का रास्ता साफ कर दिया है।
आरोप पत्र समय पर दाखिल नहीं हो पाया
याचिकाकर्ता भारती चौबे की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अजय शंकर रायज़ादा ने अदालत के समक्ष मुख्य दलील पेश की। उन्होंने तर्क दिया कि 9 फरवरी 2026 को निलंबन आदेश जारी होने के बाद से निर्धारित समय सीमा के भीतर विभाग द्वारा कोई भी आरोप पत्र पेश नहीं किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के अजय कुमार चौधरी मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि बिना आरोप पत्र के निलंबन की कार्रवाई को लंबे समय तक जारी नहीं रखा जा सकता। कानूनी प्रावधानों के अनुसार निलंबन की एक निश्चित अवधि के बाद आरोप पत्र दाखिल करना अनिवार्य होता है। इस प्रक्रिया में चूक होने के कारण निलंबन आदेश की वैधता पर सवाल उठना स्वाभाविक है और इसी आधार पर राहत की मांग की गई थी।
अपील का विकल्प तय करेगा निलंबन का भविष्य
राज्य शासन की ओर से सरकारी वकील ने पक्ष रखते हुए कहा कि निलंबन के खिलाफ सेवा नियमों के तहत अपील का एक वैकल्पिक रास्ता हमेशा खुला रहता है। इसे सीधे हाईकोर्ट में चुनौती देने के बजाय विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष रखना चाहिए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि यदि भारती चौबे 15 दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील प्रस्तुत करती हैं, तो प्राधिकारी को 45 दिनों के भीतर उस पर अंतिम निर्णय लेना होगा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान निलंबन आदेश पर प्रभावी रोक बनी रहेगी। अदालत के इस आदेश से एएसआई को फौरी तौर पर काम पर लौटने या निलंबन से मुक्ति पाने का मौका मिल गया है।
