
जबलपुर। मध्य प्रदेश में अब जमीनों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया काफी सुगम होने वाली है। प्रदेश सरकार ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 के तहत महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए राजस्व अधिकारियों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 2 जून को हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय के अनुरूप पंजीयन और मुद्रांक विभाग ने आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। अब तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार को भी सब रजिस्ट्रार के अधिकार प्राप्त हो गए हैं। इस नई व्यवस्था का सीधा लाभ प्रदेश के 48 लाख से अधिक उन परिवारों को मिलेगा, जो आबादी भूमि पर काबिज हैं और मालिकाना हक का इंतजार कर रहे हैं। सरकार ने इस योजना के तहत स्टॉम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क पूरी तरह से माफ करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। 3800 करोड़ रुपये का वित्तीय भार सरकार स्वयं वहन करेगी और पंचायतों को उपकर की राशि भी सरकार की ओर से दी जाएगी।
राजस्व अधिकारियों को मिले अब रजिस्ट्री करने के विशेष अधिकार
नई व्यवस्था के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अब रजिस्ट्री के लिए उप पंजीयक कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। अब तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार अपने कार्यालयों में ही जमीनों की रजिस्ट्री कर सकेंगे। जारी आदेश के अनुसार, ये अधिकारी स्वामित्व योजना के तहत आने वाली आबादी भूमि की रजिस्ट्री करने के लिए अधिकृत होंगे। सरकार का मानना है कि इस कदम से रजिस्ट्री प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा और ग्रामीणों को उनके मालिकाना हक के दस्तावेज जल्द प्राप्त हो सकेंगे। 235 सब रजिस्ट्रार के अलावा अब ये राजस्व अधिकारी भी आम नागरिकों की सुविधा के लिए पंजीकरण का काम संभालेंगे। इससे राजस्व न्यायालयों के कामकाज पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि जमीनों से जुड़े लंबित प्रकरणों के निपटारे में तेजी आएगी।
48 लाख परिवारों को मिलेगा अब मालिकाना हक का बड़ा तोहफा
स्वामित्व योजना के माध्यम से प्रदेश सरकार ने आबादी भूमि को व्यवस्थित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 48 लाख परिवारों को मालिकाना हक देने की इस पहल में रजिस्ट्री शुल्क पूरी तरह से शून्य कर दिया गया है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि पंचायत उपकर का भार भी आम जनता पर न पड़े, इसलिए इसे भी पूरी तरह माफ कर दिया गया है। इस निर्णय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और जमीनों के विवादों में कमी आएगी। सरकार ने वित्तीय प्रबंधन के तहत 3800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है ताकि ग्रामीणों को निःशुल्क रजिस्ट्री की सुविधा मिल सके। इस पहल से न केवल कागजी प्रक्रिया सरल हुई है, बल्कि गरीबों को अपनी जमीन का वैध दस्तावेज प्राप्त करने का सपना भी साकार हो रहा है।
रजिस्ट्री प्रक्रिया में आम जनता को मिलेगी अब बड़ी राहत
पंजीयन और मुद्रांक विभाग द्वारा जारी नोटिफिकेशन के बाद प्रदेश भर में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर लगाकर रजिस्ट्री करने की सुविधा भी दी जा सकती है ताकि वृद्ध और असहाय लोग आसानी से लाभ उठा सकें। सब रजिस्ट्रार के साथ-साथ अब राजस्व न्यायालय के काम करने वाले अधिकारी भी इस प्रक्रिया में शामिल होने से काम का बोझ कम होगा। यह व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी है और इसमें भ्रष्टाचार की संभावना को खत्म करने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड का उपयोग किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले महीनों में सभी पात्र परिवारों को उनकी जमीन के पट्टे और रजिस्ट्री के कागज मिल जाएं। यह पूरी प्रक्रिया सरल, तेज और पूरी तरह से आम आदमी के हितों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
