
जबलपुर। जबलपुर विकास प्राधिकरण में इस समय प्रशासनिक सुस्ती और उच्च स्तर पर नियमों की अनदेखी का एक अजीब मामला सामने आया है जिसे लेकर पूरे शहर में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। भोपाल से जारी हुए स्थानांतरण आदेश को एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन जेडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपक वैद्य अभी भी अपनी पुरानी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। विभागीय जानकारों का कहना है कि वे किसी प्रभावशाली व्यक्ति के आश्वासन के भरोसे इस आदेश को दरकिनार कर रहे हैं। सामान्य तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था में शासन के आदेश के बाद अधिकारी तुरंत कार्यभार मुक्त होकर नए स्थान पर ज्वाइन करते हैं लेकिन इस मामले में एक महीने से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी सीईओ का कार्यालय में जमे रहना और हाल ही में चार दिन की छुट्टी बिताकर वापस आकर कामकाज संभालना कई तरह के गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। कार्यालय के भीतर और बाहर सुगबुगाहट तेज है कि आदेश की ऐसी अनदेखी शासन के निर्देशों की सीधी अवहेलना की श्रेणी में आती है और जल्द ही इस पर भोपाल से कोई बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई गाज बनकर गिर सकती है।
शासन के आदेश को कचरे में डालने का खेल
स्थानांतरण आदेश आने के बाद भी जेडीए कार्यालय में सीईओ दीपक वैद्य की निरंतर उपस्थिति ने स्थानीय प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी भोपाल में नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग न देना इस बात की ओर इशारा करता है कि स्थानीय स्तर पर उन्हें किसी वजनदार व्यक्ति का मजबूत संरक्षण प्राप्त है। जानकारों का कहना है कि शासन स्तर से स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद इस तरह कुर्सी से चिपके रहना और उच्चाधिकारियों के आदेशों की परवाह न करना विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
अंदर-अंदर जारी है फाइलों का गोरखधंधा
कार्यालय के भीतर के सूत्रों का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे श्री वैद्य के साथ अन्य चेहरों की गहरी मिलीभगत है। ट्रांसफर आर्डर के बाद भी कार्यालय में रुकी हुई और विवादित फाइलों को निपटाने में जुटे हैं ताकि विदाई से पहले सारे पुराने पेंच कस दिए जाएं। छुट्टी बिताकर लौटने के बाद से ही इन खास मामलों पर तेजी से काम चल रहा है जिसे लेकर विभागीय कर्मचारियों में भी नाराजगी और हैरानी का माहौल बना हुआ है।
भोपाल से कभी भी गिर सकती है बड़ी गाज
शासन के नियमों के खिलाफ जाकर एक महीने से अधिक समय तक ट्रांसफर आर्डर का पालन न करने की इस जिद पर अब भोपाल स्तर के वरिष्ठ अधिकारी गंभीर हो चुके हैं। नाफरमानी के इस मामलों को लेकर सचिवालय में सुगबुगाहट तेज है और कभी भी प्रशासनिक अमले की ओर से सख्त कार्रवाई के आदेश जारी हो सकते हैं। यदि समय रहते सीईओ ने कार्यभार नहीं छोड़ा तो यह मामला उनके सेवा रिकॉर्ड के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है।
