अटैचमेंट का हनीमून समाप्त,रातों रात स्कूल भेजे गए मास्साब

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Newzo - News Editor 67 Views
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राजनीतिक दबाव भी फेल, अब स्कूलों में पढ़ाने पर ही मिलेगा वेतन, भोपाल की सख्ती लायी रंग

जबलपुर। शिक्षा विभाग में सालों से चली आ रही अटैचमेंट व्यवस्था पर अब पूर्ण विराम लग गया है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जबलपुर ने सख्त कदम उठाते हुए विभिन्न कार्यालयों में डटे 7 शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर उनकी मूल संस्थाओं में भेज दिया है। इसमें ऋषि परौहा को तहसीलदार कार्यालय से कुम्ही, मोहम्मद तारिक मंसूरी को तहसील पनागर से डुंगरिया, मनोज कुमार गुप्ता को बीईओ कार्यालय से अधारताल, विकास चौदहा को कलेक्ट्रेट से बेलबाग, सुरेश झारिया को तहसील गोरखपुर से गढ़ा, नीरजा द्विवेदी को छात्रावास नीमखेड़ा से पड़वार और मनोज कुमार पांडे को जिला पंचायत से सालीवाड़ा स्कूल भेजा गया है। यह कार्रवाई 13 जुलाई को भोपाल में प्रमुख सचिव संजय गोयल की बैठक और उनके कड़े निर्देशों के बाद अमल में लाई गई है। इसके चलते अब इन शिक्षकों को शिक्षण कार्य करना अनिवार्य होगा।

​दफ्तर की मौज छोड़ अब पढ़ाएंगे स्कूल

​अटैचमेंट के नाम पर लंबे समय से मलाई काट रहे और शिक्षण कार्य से दूरी बनाए रखने वाले शिक्षकों की अब मुश्किलें बढ़ गई हैं। ये शिक्षक विभिन्न सरकारी दफ्तरों में बाबूगीरी कर रहे थे और कागजी कार्यों में व्यस्तता का हवाला देकर स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने से बच रहे थे। हैरानी की बात यह है कि जिन दफ्तरों में ये अटैच थे, वहां भी इनका कोई विशेष योगदान नहीं था। इन शिक्षकों ने अपना अटैचमेंट बचाए रखने के लिए राजनीतिक गलियारों में जमकर पैरवी की और प्रभावशाली लोगों के माध्यम से आदेश रुकवाने की कोशिश भी की, लेकिन ऊपर से मिले सख्त निर्देशों के आगे इनकी एक न चली। विभाग का स्पष्ट संदेश है कि अब शिक्षक सिर्फ पढ़ाएंगे, तभी उन्हें वेतन प्राप्त होगा।

​भोपाल के कड़े आदेशों से हिला प्रशासन

​शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव संजय गोयल ने इस व्यवस्था को सुधारने के लिए कड़ा रुख अख्तियार किया था। उन्होंने कलेक्टरों के साथ सीधी बातचीत की और स्पष्ट किया कि 24 घंटे के भीतर हर हाल में सभी शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण करना होगा। इस फरमान के बाद जबलपुर जिला प्रशासन और शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया। आनन फानन में इन शिक्षकों को रिलीव करने की प्रक्रिया पूरी की गई। किसी भी प्रकार की राजनीतिक सिफारिश या दबाव ने इस बार काम नहीं किया, क्योंकि प्रशासनिक अमला सीधे शासन के स्तर से मॉनिटरिंग कर रहा था। शिक्षकों के स्कूल वापस लौटने से अब स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था सुदृढ़ होने की उम्मीद है।

​नई व्यवस्था से शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी

​स्कूलों में शिक्षकों की कमी एक बड़ा मुद्दा रही है, जबकि दूसरी तरफ बड़ी संख्या में शिक्षक बिना किसी ठोस कारण के दफ्तरों में जमे थे। अब इन शिक्षकों की मूल विद्यालय में वापसी से रिक्त पदों पर पढ़ाई शुरू हो सकेगी। विभाग का यह निर्णय उन ग्रामीण और शहरी स्कूलों के लिए बड़ी राहत है जहां शिक्षक न होने से बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा था। अब सभी शिक्षकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे पूरी निष्ठा के साथ अपने संबंधित स्कूल में उपस्थिति दर्ज कराएं और शिक्षण कार्य करें। कार्यालयों में अटैच होकर वेतन पाने का सिलसिला अब इतिहास बन चुका है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी।

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