
जबलपुर। तहसील मुख्यालयों पर बुधवार को भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में महाकौशल के किसानों ने बड़ा प्रदर्शन किया। ग्रीष्मकालीन मूंग की सरकारी खरीदी में आ रही बाधाओं और कम खरीद सीमा को लेकर किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है। पाटन से मुकुल पचौरी, शहपुरा से वीरेंद्र साहू, मंझोली से वीरेंद्र पटेल, पनागर से जितेंद्र पटेल और सिहोरा से शैलेंद्र पटेल के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। किसानों का स्पष्ट कहना है कि मूंग की मात्र 25 प्रतिशत सरकारी खरीदी उनकी मेहनत का अपमान है और एमएसपी पर पूरा अनाज खरीदना सरकार की जिम्मेदारी है।
खरीदी की सीमा बढ़ाने के लिए सरकार पर दबाव
वर्तमान में सरकार ने मूंग की खरीदी सीमा प्रति एकड़ मात्र 1.5 क्विंटल तय की है जो किसानों के लिए घाटे का सौदा है। किसानों का तर्क है कि खेतों में औसतन 4 से 5 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन होता है। इसलिए सरकार को खरीदी की सीमा बढ़ाकर न्यूनतम 5 क्विंटल प्रति एकड़ तत्काल करना चाहिए। किसानों के अनुसार खुले बाजार में फसल बेचने पर उन्हें प्रति क्विंटल 2000 से 2500 रुपए का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है।
पंजीयन से वंचित किसानों को राहत देने पर जोर
गिरदावरी और तकनीकी खामियों के कारण बड़ी संख्या में किसान अभी भी पंजीयन कराने से वंचित रह गए हैं। सरकार से मांग की गई है कि ऐसे किसानों को अवसर देने के लिए पंजीयन की तिथि फिर से घोषित की जाए। इसके साथ ही खरीदी केंद्रों की दूरी कम करने और स्थानीय स्तर पर बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि इन चार बिंदुओं पर सरकार ने तुरंत उचित निर्णय नहीं लिया और प्रशासन ने आदेश जारी नहीं किए, तो भारतीय किसान संघ पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
