नागरिक उपभोक्ता मंच की शिकायत पर जस्टिस द्विवेदी ने बरती सख्ती

जबलपुर। बरगी क्रूज दुर्घटना की जांच के लिए गठित आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संजय द्विवेदी ने बरगी बांध में डूबे क्रूज के महत्वपूर्ण अवशेषों को सुरक्षित करने के कड़े निर्देश दिए थे, लेकिन उनका पालन नहीं किया गया। आज नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे व अन्य ने आयोग के समक्ष एक गंभीर प्रतिवेदन पेश किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग द्वारा अनुमति देने के बावजूद क्रूज के इंजन, जनरेटर और अन्य अवशेषों को अभी तक सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित नहीं किया गया है। मंच का कहना है कि बरगी बांध में जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे ये साक्ष्य हमेशा के लिए जलमग्न हो सकते हैं। डॉ. नाजपांडे ने इस स्थिति को जांच प्रभावित करने का सुनियोजित प्रयास बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। इस दौरान मंच के प्रतिनिधि रजत भार्गव और एडवोकेट वेदप्रकाश अधोलिया भी मौजूद रहे।
साक्ष्यों के जलमग्न होने से खड़ी होगी चुनौती
बरगी बांध का जलस्तर बारिश में बढ़ेगा है,जिससे जांच की निष्पक्षता पर खतरा पैदा होगा। याचिका में स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया शुरू होने से पूर्व ही क्रूज को डिसमेंटल कर दिया गया था, जिससे उसकी फिटनेस और क्षमता का आकलन करना अब बेहद कठिन हो गया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संजय द्विवेदी ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए अधीनस्थ तहसीलदार को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने का आदेश दिया है। तहसीलदार को निर्देश दिए गए हैं कि वे संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगें कि आयोग की पूर्व अनुमति मिलने के बाद भी अवशेषों को अब तक सुरक्षित क्यों नहीं रखा गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब हर हाल में शेष बचे सभी अवशेषों को संरक्षित किया जाना अनिवार्य है।
साक्ष्यों से छेड़छाड़ पर आयोग का कड़ा रुख
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच का आरोप है कि इन महत्वपूर्ण साक्ष्यों के साथ जानबूझकर खिलवाड़ किया जा रहा है ताकि बरगी क्रूज हादसे की कमियों को उजागर न किया जा सके। इनलैंड वेसल एक्ट 2021 की धारा 75(5) के तहत क्रूज में तोड़फोड़ करने का अधिकार किसी को भी नहीं है, फिर भी अधिकारियों द्वारा की गई यह कार्रवाई जांच की दिशा बदलने वाली है। जस्टिस संजय द्विवेदी ने मंच द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन को रिकॉर्ड में लेने के आदेश जारी कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तहसीलदार इन साक्ष्यों को बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर क्या कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। क्रूज के मलबे के रूप में बचे हुए यही साक्ष्य सच्चाई तक पहुँचने का एकमात्र जरिया हैं।
