अप्रत्याशित मूल्य वृद्धि के खिलाफ वरिष्ठ जिला पंजीयक को साक्ष्य सहित शिकायत प्रेषित

जबलपुर। जबलपुर के महाराजपुर क्षेत्र में कलेक्टर गाइडलाइन की दरों में 15 गुना की अप्रत्याशित बढ़ोतरी से रियल एस्टेट कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है। ग्राम महाराजपुर के शहीद बिरसा मुंडा वार्ड क्रमांक 75 के अंतर्गत आने वाली कृषि भूमि खसरा नंबर 6/5, जिसका क्षेत्रफल 2.0230 हेक्टेयर है, की सरकारी दर वर्ष 2025-26 में 1 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर थी, जिसे वर्ष 2026-27 की नई गाइडलाइन के पृष्ठ क्रमांक 71 और सीरियल क्रमांक 691 में बढ़ाकर सीधे 15 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है। इस विसंगति के खिलाफ संस्कार रियल स्टेट农业 प्रो एवं प्लांटेशन कंपनी के गुरदीप सिंह सलूजा और राजेंद्र कुमार अग्रवाल ने वरिष्ठ जिला पंजीयक को लिखित शिकायत सौंपी है, जिसकी प्रतिलिपि मध्य प्रदेश के स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के महानिदेशक को भी भेजी गई है।
त्रुटिपूर्ण नीति से उपजा गंभीर आर्थिक संकट
प्रशासनिक तंत्र द्वारा निर्धारित नई मूल्यांकन नीति ने भूमि बाजार के जानकारों और अनुभवी विश्लेषकों को पूरी तरह चौंका दिया है। किसी भी ग्रामीण या अर्ध-शहरी अंचल में एक ही वर्ष के भीतर सरकारी दामों में ऐसा उछाल व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है। बिना किसी ठोस धरातलीय समीक्षा के बंद वातानुकूलित कमरों में तैयार की गई इस सूची ने स्थानीय भूमि स्वामियों को बड़े संकट में धकेल दिया है। इस गंभीर मानवीय भूल या लिपिकीय चूक को अंतिम रूप से प्रकाशित करने से पहले उच्चाधिकारियों द्वारा जांच न करना बड़ी चूक है। सजग नागरिकों को अब नई सूची के अन्य पृष्ठों में भी ऐसी ही अदृश्य त्रुटियों के होने की प्रबल आशंका सताने लगी है।
अत्यधिक स्टांप ड्यूटी से खरीद-फरोख्त बंद
दामों में हुई इस काल्पनिक वृद्धि के कारण संबंधित क्षेत्र में संपत्तियों का सामान्य विनिमय और क्रय-विक्रय पूरी तरह बाधित हो गया है। नई दरों के प्रभावी होने से स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क का वित्तीय भार इतना बढ़ गया है कि मध्यमवर्गीय व्यापारियों और आम जनता के लिए इसे वहन करना बजट से बाहर हो गया है। इस विसंगति से संस्कार रियल स्टेट कंपनी सहित क्षेत्र के तमाम कृषकों और पड़ोसी भू-स्वामियों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। इस अव्यावहारिक मूल्य निर्धारण ने फलते-फूलते प्रादेशिक रियल एस्टेट व्यवसाय को अचानक मंदी के गहरे दलदल में धकेल दिया है जिससे राजस्व को भी नुकसान हो रहा है।
दस्तावेजी प्रमाण के साथ त्वरित जांच शुरू
पीड़ित पक्ष ने अपने दावों को प्रमाणित करने के लिए शिकायत के साथ वर्ष 2025-26 के मूल रजिस्ट्री दस्तावेज और सरकारी गाइडलाइन की सत्यापित प्रतियां मुख्य साक्ष्य के रूप में सौंपी हैं। पिछले वर्ष इसी न्यायसंगत दर पर क्षेत्र में जमीनों के वैधानिक पंजीकरण सुचारू रूप से हुए थे। इन ठोस साक्ष्यों के आधार पर इस व्यक्तिगत लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है। जबलपुर के जिला पंजीयक पवन अहिरवाल ने प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए शिकायत को आगामी दिशा-निर्देशों के लिए भोपाल मुख्यालय भेज दिया है। पीड़ित पक्ष ने आम जनता को राहत देने के लिए इस त्रुटिपूर्ण विसंगति के तत्काल विधिक पुनर्विलोकन और त्वरित दर संशोधन की पुरजोर मांग की है।
