
जबलपुर। स्कूल शिक्षा विभाग ने शासकीय शिक्षकों के स्वैच्छिक तबादलों के आवेदनों में विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र जमा करने की बाध्यता को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह द्वारा सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी नए आदेश के अनुसार, अब पति-पत्नी के आधार पर स्थानांतरण चाहने वाले आवेदक शिक्षक मैरिज सर्टिफिकेट के स्थान पर अपनी समग्र आईडी, सत्यापित सेवा पुस्तिका की प्रति अथवा अन्य वैध दस्तावेज जमा करके ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। विभाग द्वारा 6 जून को जारी मूल तबादला नीति में इस प्रमाण पत्र का कोई उल्लेख नहीं था, लेकिन ऑनलाइन पोर्टल पर इसे अनिवार्य किए जाने से प्रदेशभर के शिक्षक परेशान थे। इस विसंगति के सामने आने के बाद विभाग ने नियमों में यह बड़ा सुधार किया है। हालांकि इस राहत के बाद भी तबादला प्रक्रिया में कई तकनीकी और नीतिगत अड़चनें बरकरार हैं, जिससे अंतिम तिथि तक अनेक शिक्षक अपना आवेदन जमा नहीं कर पाए हैं। इस संबंध में राज्य अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश यादव और शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल सहित विभिन्न शिक्षक प्रतिनिधियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से मुलाकात कर पोर्टल की त्रुटियों को सुधारने और आवेदन की अंतिम तिथि आगे बढ़ाने की मांग की है ताकि पात्र शिक्षक लाभान्वित हो सकें।
वैकल्पिक दस्तावेजों से मिलेगा ट्रांसफर का मौका
स्कूल शिक्षा विभाग के इस नए फैसले से उन हजारों शिक्षक और शिक्षिकाओं को बहुत बड़ी राहत मिली है जो केवल विवाह प्रमाण पत्र न होने के कारण ऑनलाइन आवेदन करने से वंचित हो रहे थे। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि यदि शिक्षकों के पास विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है, तो वे अपने दावे के समर्थन में अन्य शासकीय अभिलेख प्रस्तुत कर सकते हैं। सत्यापित सर्विस बुक की प्रति या परिवार की समग्र आईडी को अब पूर्ण रूप से मान्य किया जाएगा। ऑनलाइन पोर्टल पर इस नए विकल्प को जोड़ दिया गया है ताकि शिक्षकों को लॉगइन करने के बाद कोई असुविधा न हो। शिक्षक संगठनों का कहना है कि पूर्व में नीति स्पष्ट न होने से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी और पोर्टल पर आवेदन अटक रहे थे।
कठिन नीतिगत शर्तों से शिक्षक प्रक्रिया से बाहर
राहत के इस फैसले के बावजूद स्वैच्छिक स्थानांतरण की डगर शिक्षकों के लिए अब भी आसान नहीं दिखाई दे रही है। राज्य के विभिन्न शिक्षक संगठनों का दावा है कि विभाग द्वारा लगाई गई 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की कड़ी शर्त के कारण लगभग 90 प्रतिशत शिक्षक इस प्रक्रिया से पहले ही बाहर हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त जो शिक्षक वर्तमान में राष्ट्रीय जनगणना या अन्य महत्वपूर्ण शासकीय कार्यों में संलग्न हैं, उनके तबादलों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही एक ही स्थान पर 3 वर्ष की न्यूनतम सेवा अवधि पूरी करने की अनिवार्य शर्त ने भी बड़ी संख्या में आवेदकों को इस अवसर से दूर कर दिया है। अंतिम तिथि नजदीक होने के कारण सर्वर पर भी भारी दबाव देखा जा रहा है जिससे फॉर्म सबमिट करने में भारी असुविधा हो रही है।
पोर्टल से परेशान हो रहे दिव्यांग आवेदक
स्थानांतरण पोर्टल की तकनीकी खामियों का सबसे अधिक खामियाजा दिव्यांग और गंभीर बीमारियों से पीड़ित शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। नियमों के अनुसार दिव्यांग श्रेणी के शिक्षकों से केवल 1 वर्ष की अवधि के भीतर जारी किया गया नया दिव्यांगता प्रमाण पत्र अपलोड करने को कहा जा रहा है। व्यावहारिक रूप से अधिकांश दिव्यांग शिक्षकों के पास मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी किए गए स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र उपलब्ध हैं, जिन्हें पोर्टल का सॉफ्टवेयर स्वीकार ही नहीं कर रहा है। इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण सबसे जरूरतमंद शिक्षक भी आवेदन पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इसी समस्या को लेकर उपेंद्र कौशल और जगदीश यादव ने स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से मिलकर पोर्टल की सभी विसंगतियों को तुरंत दूर करने और आवेदन की समय सीमा को कुछ दिन और आगे बढ़ाने का विशेष आग्रह किया है ताकि कोई भी योग्य शिक्षक इस महत्वपूर्ण अवसर से वंचित न रह जाए।
