
जबलपुर। पुणे के बहुचर्चित पोर्श कार हादसे में जान गंवाने वाली जबलपुर की सॉफ्टवेयर इंजीनियर अश्विनी कोष्टा के पिता सुरेश कुमार कोष्टा ने मुख्य आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल की जमानत निरस्त करने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। मई 2024 में हुए इस दर्दनाक हादसे में अश्विनी कोष्टा और उमरिया निवासी उनके साथी इंजीनियर अनीस अवधिया की मौत हो गई थी। इस मामले में आरोपी विशाल अग्रवाल को 10 मार्च को सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिली थी। अब मृतिका के पिता ने पुणे न्यायालय में आवेदन दायर कर आरोपी पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुरेश कुमार कोष्टा का कहना है कि उनकी बेटी की दूसरी बरसी के ठीक बाद आरोपी परिवार का सोशल मीडिया पर जश्न मनाते हुए एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसने उनके जख्मों को फिर से हरा कर दिया है।
जश्न के वीडियो से पीड़ित परिवार अत्यंत आहत
बेटी को खोने के गम में डूबे पीड़ित पिता ने इस वीडियो के सामने आने पर गहरी नाराजगी जताई है। सुरेश कुमार कोष्टा के अनुसार जब उनका परिवार अश्विनी की दूसरी बरसी पर शोक मना रहा था, तभी जमानत पर छूटे विशाल अग्रवाल का अपने दोस्तों और परिवार के साथ नाचते-गाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। हालांकि आरोपी पक्ष द्वारा इस वीडियो को पुराना बताया जा रहा है, लेकिन पीड़ित पिता का तर्क है कि अगर यह पुराना भी था, तो इसे जानबूझकर इसी संवेदनशील समय पर क्यों वायरल किया गया। उन्होंने इसे पीड़ित परिवार की भावनाओं को आहत करने और मानसिक ठेस पहुंचाने की सोची-समझी साजिश करार दिया है।
कानूनी ढिलाई और वीवीआईपी ट्रीटमेंट पर सवाल
सुरेश कुमार कोष्टा ने इस पूरी घटना को सामान्य दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए इसे सीधे तौर पर हत्या बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिजनों की सह और लचर कानून व्यवस्था के कारण ही यह खौफनाक हादसा हुआ। पिता ने दावा किया कि हादसे के बाद थाने में नाबालिग आरोपी को वीवीआईपी सुविधाएं दी गईं और मामले को दबाने के लिए मेडिकल रिपोर्ट में भी हेरफेर करने की कोशिश की गई। उनके अनुसार नशे में धुत नाबालिग द्वारा 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कार चलाकर दो होनहार युवाओं की जान लेना एक गंभीर अपराध है, जिसमें आरोपी पक्ष को कोई पछतावा नहीं है।
जमानत निरस्त करने को लेकर अदालती कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुणे पुलिस ने भी सक्रियता दिखाते हुए आरोपी की जमानत रद्द कराने के लिए न्यायालय में अपना आवेदन प्रस्तुत किया है। पुणे न्यायालय में इस आवेदन पर मंगलवार को प्रारंभिक सुनवाई भी पूरी हो चुकी है। पीड़ित परिवार ने न्यायालय से भावुक अपील करते हुए कहा है कि आरोपी पक्ष के इस संवेदनहीन कृत्य को आधार मानकर विशाल अग्रवाल की जमानत को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए, ताकि न्याय व्यवस्था पर आम जनता का भरोसा कायम रह सके।
