बरगी क्रूज हादसा: जबलपुर से भोपाल तक बयानों की तपिश: जस्टिस द्विवेदी बोले, अभी राज़ ही रहने दें अफसरों के बयान, आयोग के रडार पर प्रदेश के सभी क्रूज़-वाटर स्पोर्ट्स

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Newzo - News Editor 37 Views
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सुरक्षा उपायों पर रहेगा विशेष फोकस, साक्ष्य सुरक्षित रखने के लिए क्रूज़ से इंजन-जनरेटर हटाने की दी अनुमति’

जबलपुर। बरगी डैम में हुए क्रूज़ हादसे की परतें खोलने के लिए गठित विशेष जांच आयोग की कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ रही है। मामले की कमान संभाल रहे जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संजय द्विवेदी (सेवानिवृत्त) ने जांच की वर्तमान स्थिति को लेकर अहम जानकारियां साझा की हैं। जस्टिस द्विवेदी ने मीडिया को बताया कि हादसे की गहन पड़ताल के लिए बयानों और गवाहियों का सिलसिला लगातार जारी है। इसी क्रम में आयोग के समक्ष पर्यटन विभाग के सचिव इलैया राजा टी. और पर्यटन विभाग के प्रबंध निदेशक (एमडी) दिलीप यादव के विस्तृत बयान दर्ज किए गए हैं। जस्टिस संजय द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि इससे पहले प्रशासनिक स्तर पर जो शुरुआती समिति बनी थी, उसके सामने इन वरिष्ठ अधिकारियों के बयान दर्ज नहीं हो सके थे, इसीलिए अब आयोग ने इन्हें बुलाकर पूछताछ की है। उन्होंने कहा कि बयानों का यह दौर अभी थमा नहीं है और कुछ अन्य आवश्यक लोगों को भी बयान के लिए बुलाया जाना बाकी है।

​बयानों की गोपनीयता पर दो टूक: अंतिम रिपोर्ट में ही सामने आएंगी बातें

​पत्रकारों द्वारा जब अधिकारियों से पूछे गए सवालों और उनके बयानों की जानकारी मांगी गई, तो जस्टिस संजय द्विवेदी ने पूरी गोपनीयता बरतते हुए दो टूक शब्दों में कहा,यह आपकी जानकारी के लिए नहीं है, हम आपको अभी यह उजागर नहीं करेंगे कि बयानों में क्या कहा गया है। घटना से संबंधित बिंदुवार बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अब अगर हम यह बताएं कि हमने क्या सवाल पूछे, तो फिर आप पूछेंगे कि उन्होंने जवाब क्या दिए। ऐसा नहीं होता है, अभी इंक्वायरी को व्यवस्थित तरीके से चलने दीजिए। जो भी तथ्य सामने आएंगे, वे सीधे आयोग की रिपोर्ट में शामिल होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आम आदमी की अपेक्षा, इन उच्चाधिकारियों से पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति और उनका तरीका काफी अलग और तकनीकी होता है।

पुरानी समिति के बयानों को भी लिया संज्ञान में

​जांच के दायरे की विस्तृत जानकारी देते हुए जस्टिस द्विवेदी ने बताया कि अब तक लगभग 15 से 20 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। आयोग केवल नए बयान ही नहीं ले रहा, बल्कि पुरानी समिति द्वारा दर्ज किए गए बयानों को भी संज्ञान में लेकर उनकी बारिकी से समीक्षा कर रहा है। उन्होंने बताया कि पुरानी फाइलों को देखने के बाद यदि आयोग को लगता है कि किसी गवाह से कोई महत्वपूर्ण बात छूट गई थी या किसी से दोबारा पूछताछ जरूरी है, तो उन्हें फिर से समन भेजकर बुलाया जा रहा है और उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। वहीं, क्रूज़ को तोड़े जाने या उसके क्षतिग्रस्त होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह भी हमारी जांच का एक मुख्य विषय है और यह पूरी बात रिपोर्ट में खुलकर सामने आएगी।

​प्रदेश के सभी 15 वाटर स्पोर्ट्स और 5 क्रूज़ स्थलों का होगा फिजिकल इंस्पेक्शन

​जांच की समयसीमा को लेकर जस्टिस द्विवेदी ने कहा कि कोई निश्चित तारीख बताना अभी मुश्किल है, लेकिन आयोग की कोशिश है कि इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने बताया कि इस पूरी जांच का एक दूसरा और बेहद महत्वपूर्ण पहलू सुरक्षा और बचाव उपायों (सेफ्टी मेजर्स) से जुड़ा है। उन्होंने चौंकाने वाले आंकड़े साझा करते हुए बताया कि, वर्तमान में पूरे मध्य प्रदेश में 15 अलग-अलग स्थानों पर वाटर स्पोर्ट्स एक्टिविटीज संचालित की जा रही हैं। प्रदेश के 5 प्रमुख पर्यटन केंद्रों पर क्रूज़ एक्टिविटीज का संचालन हो रहा है। जस्टिस द्विवेदी ने कहा कि इन सभी जगहों की सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत जानने के लिए आयोग खुद मौके पर जाकर भौतिक निरीक्षण (फिजिकल इंस्पेक्शन) करेगा, जिसके बाद ही अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी।

​सबूतों की प्रामाणिकता पर नहीं पड़ेगा असर, इंजन-जनरेटर हटाने की दी मंजूरी

​क्रूज़ के कल-पुर्जे हटाए जाने को लेकर उठ रहे सवालों पर स्थिति साफ करते हुए आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संजय द्विवेदी ने बताया कि आयोग ने क्रूज़ के तीन मुख्य मैकेनिकल हिस्सों—इंजन और जनरेटर—को वहां से हटाने की अनुमति पर्यटन विभाग को दे दी है। इसके पीछे का तार्किक कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पानी का स्तर बढ़ेगा, जिससे ये महंगे उपकरण पानी में डूबकर हमेशा के लिए खराब हो सकते थे। इसलिए इन्हें सुरक्षित स्थान पर निकालकर रखने को कहा गया है, ताकि यदि भविष्य में संबंधित कंपनी के विशेषज्ञों को बुलाकर इनका मैकेनिकल निरीक्षण कराना पड़े, तो आयोग वह आसानी से करा सके। उन्होंने पत्रकारों को आश्वस्त करते हुए कहा कि इन्हें मौके से उठाने से केस की प्रामाणिकता या सबूतों पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि आयोग की टीम पहले ही दुर्घटनास्थल का दौरा करके सभी आवश्यक फोटोग्राफ और साक्ष्य अपने रिकॉर्ड में दर्ज कर चुकी है।

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