
उपभोक्ता मंच ने सौंपी साक्ष्यों के साथ रिपोर्ट, क्रूज डिजाइन और फिटनेस में थी बड़ी गड़बड़ी
जबलपुर। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने बरगी क्रूज हादसे में प्रशासनिक लापरवाही को लेकर एक नया मोर्चा खोल दिया है। मंच के कर्ताधर्ता डॉ. पीजी नाजपांडे ने सोमवार को इस पूरे मामले से जुड़ा एक बेहद सनसनीखेज प्रतिवेदन एकल सदस्यीय जांच आयोग के प्रमुख जस्टिस संजय द्विवेदी को सौंपा है। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर आरोप लगाया गया है कि अपनी कमियां छुपाने के लिए जिम्मेदार अफसरों ने इनलैंड वैसल्स एक्ट 2021 की धारा 74(5) को दरकिनार करते हुए दुर्घटनाग्रस्त क्रूज को कबाड़ में तब्दील कर दिया। डॉ. नाजपांडे ने दोषपूर्ण एसओपी बनाने वाले अधिकारियों और क्रूज के लापरवाह कप्तान को इस हादसे के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर मुकदमा चलाने की मांग की है।
सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर तैयार की गई थी एसओपी
इस नए प्रतिवेदन में खुलासा किया गया है कि बरगी बांध में क्रूज का संचालन शुरू करने से पहले पानी के स्वभाव की कोई समीक्षा नहीं की गई थी। नियम कहते हैं कि लहरों की ऊंचाई और गति को मापकर जलाशय को जोन 1, जोन 2 और जोन 3 में बांटा जाना चाहिए था, जो कि अनिवार्य और बाध्यकारी प्रक्रिया है। बरगी जलाशय को लेकर ऐसी कोई भी तकनीकी मैपिंग नहीं की गई थी। क्रूज की वास्तविक श्रेणी, उसकी बनावट और उसकी भार वहन क्षमता को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए अफसरों ने दफ्तर में बैठकर एक कागजी और दोषपूर्ण एसओपी तैयार कर दी। यही गलत नियम अंततः इस क्रूज के जलमग्न होने और दुर्घटनाग्रस्त होने की मुख्य वजह बने।
जांच से पहले क्रूज काटने के पीछे गहरी साजिश का संदेह
रिपोर्ट में सबसे गंभीर आपत्ति इस बात पर जताई गई है कि हादसे के तुरंत बाद तकनीकी जांच पूरी किए बिना ही क्रूज को डिसमेंटल कर दिया गया। कानूनन किसी को भी क्रूज को नष्ट करने का अधिकार नहीं था, क्योंकि इसके बाद क्रूज की वास्तविक फिटनेस और क्षमता का वैज्ञानिक आंकलन असंभव हो गया। डॉ. पी.जी. नाजपांडे का दावा है कि यह कदम जानबूझकर उठाया गया ताकि तकनीकी गड़बड़ियों का सच कभी बाहर न आ सके। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जस्टिस संजय द्विवेदी ने आश्वस्त किया है कि इस प्रतिवेदन को आधिकारिक रिकॉर्ड पर ले लिया गया है और इसमें उठाए गए सभी गंभीर सवालों की बारीकी से जांच होगी।
