पाटन से भोपाल तक सरकारी नौकरी की ‘सेल’ लगाने वाला नटवरलाल गिरफ्तार

Newzo
Newzo - News Editor 42 Views
4 Min Read

जबलपुर। संजीवनी नगर थाना क्षेत्र में खुद को पुलिस विभाग का उच्च अधिकारी बताकर सरकारी विभागों में नौकरी और पक्के मकान दिलाने का झांसा देकर 21 लाख रुपए की बड़ी ठगी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शातिर जालसाज धीरेंद्र सिंह ठाकुर ने नव निवेश कॉलोनी संजीवनी नगर को अपना ठिकाना बनाकर लोगों पर रसूख जमाया और ज्योति थौराट से 2 लाख, रजनी वैद्य से 1 लाख 80 हजार, छाया उइके से 1 लाख 50 हजार, पिंकी विश्वे से 1 लाख, आरती झारिया से 80 हजार, संदीप रंगारे से 60 हजार और अभिलाषा प्रजापति से 50 हजार रुपए ऐंठ लिए। इसके साथ ही रजनी जामोलकर, हेमलता रंगारे, सुजाता जामोलकर, भारती द्विवेदी, संजय चढ़ार, सदानंद भिसेकर, अभिषेक ठाकुर, मुकेश चौधरी, ममता पांडे और कीर्ति रजक को भी शिकार बनाया। शिकायत के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया है।

​खाकी का झूठा रौब और रसूख

​आरोपी धीरेंद्र सिंह ठाकुर संजीवनी नगर इलाके में खुद को पुलिस महकमे का एक रसूखदार और बड़ा अफसर प्रोजेक्ट करता था। वह स्थानीय सीधे-साधे लोगों के बीच अपनी ऊंची पहुंच का दिखावा करता था ताकि लोग आसानी से उसकी बातों में आ जाएं। उसने सुनियोजित तरीके से लोगों को यह विश्वास दिलाया कि सरकारी तंत्र और विभिन्न विभागों में उसके मजबूत संपर्कों के कारण वह किसी की भी पक्की नौकरी लगवा सकता है।

​ सरकारी विभागों में नियुक्तियों का झांसा

​जालसाज ने अलग-अलग पीड़ितों को उनकी योग्यता के अनुसार सरकारी विभागों में पद दिलाने का लालच दिया। उसने आंगनबाड़ी में सुपरवाइजर, जल विभाग में पंप अटेंडर, सिविल कोर्ट और स्वास्थ्य विभाग में पक्की नौकरी के साथ-साथ शासकीय कोटे से सस्ते मकान दिलाने का भी बड़ा भरोसा दिया। बेरोजगारी और सरकारी नौकरी की चाहत में लोग उसके बिछाए जाल में फंसते चले गए और अपनी जमा पूंजी सौंप दी।

​वल्लभ भवन और प्रशासनिक अधिकारियों के जाली दस्तावेज

​ठग बेहद शातिर तरीके से काम करता था और पीड़ितों का भरोसा बनाए रखने के लिए समय-समय पर जाली कागजात का इस्तेमाल करता था। उसने लोगों को गुमराह करने के लिए एसडीएम कार्यालय पाटन और सिविल सर्जन नरसिंहपुर के नाम के फर्जी ज्वाइनिंग लेटर तैयार करके दिए। हद तो तब हो गई जब उसने मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव के नाम का भोपाल वल्लभ भवन से जारी एक फर्जी आदेश भी आवेदकों को थमा दिया।

​रकम डकार कर आरोपी हुआ चंपत

​काफी समय बीत जाने के बाद भी जब किसी भी पीड़ित को न तो सरकारी नौकरी मिली और न ही शासकीय आवास आवंटित हुआ, तब लोगों को अपने साथ हुई इस बड़ी धोखाधड़ी का पता चला। पीड़ितों ने जब आरोपी पर दबाव बनाना शुरू किया और अपनी डूबी हुई रकम वापस मांगी, तो उसने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया। इसके बाद वह अपने घर पर ताला लगाकर किसी अज्ञात स्थान पर भाग निकला, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी है।

Share This Article
error: This Content is protected !!