
- राज्य के 4 जिलों में अनुमानित आबादी से अधिक आधार कार्ड बनने के बाद सरकार ने उठाया कड़ा कदम
- दुर्लभ मामलों में जिला उपायुक्त की विशेष रिपोर्ट और राज्य सरकार की मंजूरी के बाद ही बनेगा कार्ड
- चाय बागान श्रमिकों और अनुसूचित जनजातियों को आवश्यक दस्तावेज बनवाने के लिए 1 अप्रैल 2027 तक की राहत
गुवाहाटी। असम सरकार ने राज्य में अवैध प्रवासियों और घुसपैठियों पर लगाम कसने के लिए एक बेहद सख्त प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि राज्य में 18 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को अब पहली बार में आसानी से आधार कार्ड जारी नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि बांग्लादेशी घुसपैठिए आधार कार्ड का उपयोग भारतीय नागरिकता का दावा करने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए एक हथियार के रूप में कर रहे हैं। राज्य में आधार कार्ड का पंजीकरण 100 प्रतिशत के पार यानी 103 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच चुका है, जिसके कारण कुछ जिलों में कुल आबादी से भी अधिक आधार कार्ड बन चुके हैं। ऐसे में पहचान की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए यह कड़ा फैसला लिया गया है। इस नए नियम के तहत अब वयस्कों को नया आधार कार्ड बनवाने के लिए राज्य सरकार की विशेष अनुमति लेनी होगी, जिसके लिए जिला स्तर पर उपायुक्तों को कड़ी जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। हालांकि, यह प्रतिबंध बच्चों, चाय बागान श्रमिकों और अनुसूचित जनजाति के लोगों पर पूरी तरह लागू नहीं होगा।
नया आधार कार्ड जारी करने के लिए जिला स्तर पर बनेगी विशेष जांच प्रणाली
राज्य सरकार ने साफ किया है कि अब 18 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति सीधे आधार केंद्र जाकर नया कार्ड नहीं बनवा सकेगा। किसी अत्यंत दुर्लभ मामले में यदि किसी वयस्क को आधार कार्ड की जरूरत पड़ती है, तो संबंधित जिले के उपायुक्त को इसके लिए राज्य सरकार को एक विशेष प्रस्ताव भेजना होगा। राज्य सरकार इस प्रस्ताव की गहनता से समीक्षा करेगी और पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही नया कार्ड जारी करने की मंजूरी दी जाएगी। यह पूरी व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि कोई भी विदेशी नागरिक गलत दस्तावेजों के आधार पर पहचान पत्र हासिल न कर सके।
चाय बागान श्रमिकों और आरक्षित जातियों को नियम में मिलेगी एक निश्चित समय तक छूट
इस सख्त नीति के बीच असम सरकार ने समाज के कुछ विशिष्ट और पिछड़े वर्गों को राहत भी दी है। चाय बागान समुदायों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के बचे हुए लोगों के लिए यह प्रतिबंध फिलहाल सीमित समय के लिए प्रभावी नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन समुदायों में अभी भी कई वास्तविक नागरिकों के आधार कार्ड बनने शेष हैं, क्योंकि वहां अभी पूर्ण संतृप्ति नहीं आई है। इन विशेष वर्गों के लिए 1 अप्रैल 2027 तक की समयसीमा तय की गई है, जिसके भीतर उनके शत-प्रतिशत आधार कार्ड बनाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद 1 अप्रैल 2027 से यह प्रतिबंध इन समुदायों के वयस्कों पर भी पूरी तरह लागू हो जाएगा।
पहचान पत्रों के दुरुपयोग पर रोक लगाने और सीमा पार से घुसपैठ रोकने का मुख्य लक्ष्य
कैबिनेट के इस फैसले के पीछे का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती राज्य में तेजी से बदल रहे जनसांख्यिकीय ढांचे की सुरक्षा करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 1 वर्ष के दौरान सीमा पार से आने वाले कई नागरिकों को पकड़ा गया है। राज्य के 4 जिलों में अनुमानित जनसंख्या से भी अधिक मात्रा में आधार कार्ड जारी होना गंभीर विसंगति की ओर इशारा करता है। सरकार ने पहले ही उन लोगों के आधार कार्ड पर रोक लगा दी थी जिन्होंने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी के लिए आवेदन नहीं किया था। नए नियमों के जरिए सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना चाहती है ताकि राज्य में केवल वैध नागरिकों को ही सरकारी पहचान और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
