संसद के मानसून सत्र में अगर आया बिजली बिल, तो पूरे देश के इंजीनियर मिलकर सरकार का ‘पावर कट’ कर देंगे

Newzo
Newzo - News Editor 138 Views
6 Min Read

विद्युत क्षेत्र को बचाने बेंगलुरु में जुटे 21 राज्यों के बिजली इंजीनियर, निजीकरण के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का एलान

जबलपुर। बेंगलुरु में 12 जून 2026 को अखिल भारतीय विद्युत अभियंता महासंघ की फेडरल एग्जीक्यूटिव बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता संगठन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने की। इसमें महासचिव पी. रत्नाकर राव, केईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बसवन्ना और महासचिव चंद्रशेखर देसाई सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। मध्य प्रदेश से विद्युत मंडल अभियंता संघ के महासचिव विकास शुक्ला और प्रचार सचिव नरेंद्र चंदेल शामिल हुए। इस दौरान देश के बिजली क्षेत्र में निजीकरण और सार्वजनिक उपक्रमों को बांटने की नीतियों पर गहरी चिंता जताई गई। महासंघ ने विद्युत संशोधन विधेयक 2025, कर्नाटक में समानांतर लाइसेंस, गूगल एआई डाटा सेंटर को रियायत, कृषि डिस्कॉम के गठन और लद्दाख में निगमकरण का पुरजोर विरोध करते हुए पुरानी पेंशन बहाली की मांग उठाई।

​संसद के आगामी सत्र में पेश होने वाले नए कानून का पुरजोर विरोध

​अखिल भारतीय विद्युत अभियंता महासंघ ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 को तुरंत वापस लेने की मांग की है। महासंघ का मानना है कि इस कानून के लागू होने से एक ही क्षेत्र में कई निजी कंपनियों को बिजली बांटने की अनुमति मिल जाएगी। इससे निजी कंपनियां केवल मुनाफा देने वाले बड़े औद्योगिक और कमर्शियल उपभोक्ताओं को ही बिजली की आपूर्ति करेंगी। इस व्यवस्था से सरकारी बिजली कंपनियां आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हो जाएंगी और आम उपभोक्ताओं सहित किसानों पर बिजली बिल का भारी आर्थिक बोझ बढ़ेगा। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि संसद के आगामी मानसून सत्र में यह बिल पेश किया गया, तो पूरे देश में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।

​राज्यों में निजी कंपनियों को लाइसेंस देने की कोशिशों पर तीखी आपत्ति

​बैठक में कर्नाटक के 5 बिजली कंपनी क्षेत्रों के 19 जिलों में टाटा पावर द्वारा समानांतर वितरण लाइसेंस के लिए दिए गए आवेदन का कड़ा विरोध किया गया। इसके साथ ही हरियाणा के गुरुग्राम और नूंह जिलों में इलेवन पावर लिमिटेड जैसी निजी कंपनियों को बिजली सप्लाई का काम सौंपने के प्रयासों को भी गलत बताया गया। इंजीनियरों ने कहा कि यह पिछले दरवाजे से बिजली क्षेत्र का निजीकरण करने की कोशिश है। इससे सरकारी कंपनियों की वित्तीय स्थिति खराब होगी, जिससे गरीब और कमजोर वर्गों को सस्ती बिजली मिलना मुश्किल हो जाएगा। आंध्र प्रदेश में गूगल एआई डाटा सेंटर को विशेष डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस देने को भी भेदभावपूर्ण और आम जनता के हितों के खिलाफ बताया गया।

​कृषि उपभोक्ताओं के लिए अलग कंपनी बनाने के फैसले को चुनौती

​आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे राज्यों में कृषि क्षेत्र के लिए अलग बिजली कंपनियां बनाने के प्रस्तावों को तकनीकी और वित्तीय रूप से पूरी तरह गलत ठहराया गया। महासंघ के अनुसार, इस कदम से एकीकृत बिजली वितरण प्रणाली छिन्न-भिन्न हो जाएगी। कृषि डिस्कॉम पूरी तरह सरकारी सब्सिडी पर निर्भर हो जाएंगे और मुख्य कंपनियों से मुनाफा कमाने वाले बड़े उपभोक्ता अलग हो जाएंगे, जिससे अंततः निजीकरण को ही बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, सामरिक रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र लद्दाख के पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के संयुक्त उद्यम और निगमकरण के प्रस्ताव का भी विरोध किया गया। नेताओं ने कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़ी यह परिसंपत्तियां पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रहनी चाहिए।

​पुरानी पेंशन योजना की बहाली, कर्मचारियों के अधिकारों का समर्थन

​बैठक में उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और दक्षिणांचल में निजीकरण के खिलाफ चल रहे बिजली कर्मियों के लोकतांत्रिक आंदोलन की सराहना करते हुए एकजुटता जताई गई। प्रशासन से मांग की गई कि कर्मचारियों पर की गई सभी दमनकारी कार्रवाइयां बिना शर्त वापस ली जाएं। इसके साथ ही देश के सभी बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के लिए पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने की मांग सर्वसम्मति से पारित की गई। राजस्थान और झारखंड सरकारों द्वारा इस दिशा में लिए गए निर्णयों का स्वागत किया गया। महासंघ ने साफ किया कि पेंशन कोई खैरात नहीं बल्कि कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मचारियों का सामाजिक सुरक्षा अधिकार है, जो सेवानिवृत्ति के बाद सम्मान से जीने के लिए जरूरी है।

हर मुद्दे पर साथ देंगे:विकास शुक्ला

​मध्य प्रदेश विद्युत मंडल अभियंता संघ के महासचिव विकास शुक्ला ने बेंगलुरु बैठक को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश का हर एक बिजली इंजीनियर निजीकरण की नीतियों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि बिजली कोई व्यावसायिक वस्तु नहीं बल्कि आम जनता के लिए एक अनिवार्य सार्वजनिक सेवा है। मध्य प्रदेश विद्युत मंडल अभियंता संघ निजीकरण के खिलाफ देश के सभी 21 राज्यों के संगठनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगा। प्रदेश के बिजली कर्मी इस निजीकरण विरोधी निर्णायक संघर्ष में अपनी पूरी ताकत झोंकने और हर स्तर पर लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

Share This Article
error: This Content is protected !!