भोपाल के कड़े आदेश के बाद भी सुधरने को तैयार नहीं लापरवाह अमला, अनुपस्थित मानकर वेतन काटने के निर्देश का भी नहीं हो रहा कोई असर, संकुल प्राचार्य और विकासखंड शिक्षा अधिकारी नहीं करवा पा रहे नियमों का पालन

जबलपुर। लोक शिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब प्रदेश के सभी शासकीय प्राचार्यों, शिक्षकों और स्टाफ के लिए ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस कड़े निर्देश के बाद भी जबलपुर के प्रांतीय राज्य शिक्षण महाविद्यालय, राज्य विज्ञान शिक्षण संस्थान, मनोविज्ञान संदर्शन महाविद्यालय और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) जैसी चार महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थाओं के अधिकारी, बाबू और शिक्षक इस नियम की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। यह चारों संस्थान पूरी तरह से शिक्षा विभाग के अधीन आते हैं और यहीं से इनका वेतन बजट जारी होता है। इसके बावजूद इन कार्यालयों में पदस्थ अधिकारी और कर्मचारी खुद को ई-हाजिरी की व्यवस्था से पूरी तरह बाहर मानकर बैठे हैं। अधिकारियों के इस ढुलमुल रवैए के कारण इन प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो चुकी है।
हाजिरी के बिना नहीं बनेगा किसी का वेतन
लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह द्वारा 9 जून को जारी डिजिटल हस्ताक्षरित आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नवीन तकनीक आधारित ई-अटेंडेंस के आधार पर ही सभी कर्मचारियों का वेतन भुगतान किया जाएगा। विकासखंड शिक्षा अधिकारियों और शाला संकुल प्राचार्यों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अपने अधीनस्थ स्टाफ की ऑनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित करें। नए नियमों के तहत जिस भी तारीख को कोई शिक्षक या बाबू ऐप पर उपस्थिति दर्ज नहीं करेगा, उसे उस दिन अनुपस्थित मानकर उसका वेतन काटने की सीधी कार्रवाई की जाएगी।
आदेश को ताक पर रखकर चल रही मनमानी
मुख्यालय के इतने सख्त रुख के बावजूद इन चारों विशिष्ट संस्थानों के स्टाफ पर कोई असर नहीं हो रहा है। यहां के शिक्षक और बाबू समय पर कार्यालय नहीं आते हैं, जिससे प्रशिक्षण से जुड़े जरूरी कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। जब भी इन कर्मचारियों से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए कहा जाता है, तो उनके पास कोई ठोस प्रशासनिक आधार नहीं होता और वे खुद को इस दायरे से बाहर बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। इस बेलगाम रवैए के कारण जमीनी स्तर पर पूरी व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है।
वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी से बढ़े हौसले
इन चारों प्रमुख संस्थानों में चल रही लेती-लतीफी और नियमों की अनदेखी को लेकर भोपाल के उच्च अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। इसके बाद भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधारात्मक कार्रवाई या औचक निरीक्षण नहीं किया गया, जिससे लापरवाह कर्मचारियों के हौसले और बुलंद हो गए हैं। संकुल प्राचार्यों को व्यक्तिगत रूप से इस लापरवाही के लिए उत्तरदायी ठहराया गया है, लेकिन इसके बाद भी कड़ाई से नियमों का पालन कराने में स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है।
अधीनस्थ स्टाफ पर नियंत्रण खोते जा रहे जिम्मेदार
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी लापरवाही संकुल प्राचार्यों और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों की सामने आ रही है, जो अपने अधीन आने वाले इन संस्थानों के स्टाफ से डिजिटल अटेंडेंस डलवाने में असमर्थ दिख रहे हैं। शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना ई-अटेंडेंस के वेतन आहरण देयक तैयार करने पर संबंधित आहरण अधिकारी के खिलाफ सीधी कार्रवाई होगी। अब देखना यह है कि लोक शिक्षण संचालनालय का यह नया आदेश इन चार बेलगाम संस्थानों के कर्मचारियों पर कितना असर डाल पाता है।
आदेश का पालन सख्ती से कराया जाएगा:सीईओ
जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सिंह गहलोत ने कहा कि ई हाजिरी के संबंध में जो भी निर्देश शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए हैं, उनका सख्ती से पालन कराया जाएगा जो आदेश का पालन नहीं करेंगे, उन पर निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी।
