करप्शन सर्वोपरि:ननि में बड़े बजट को छोटे टुकड़ों में काटकर टेंडर प्रक्रिया को दे रहे हैं चकमा

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Newzo - News Editor
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कागजों पर चमके जबलपुर के वार्ड, धरातल पर मिला सिर्फ धोखा, लूट की इस तिकड़ी के आगे भोपाल का तंत्र भी पड़ा सुस्त

    जबलपुर। जबलपुर नगर निगम में 1 लाख रुपये तक के विकास कार्यों के नाम पर अफसरों और पार्षदों ने मिलकर भ्रष्टाचार का एक नया मॉडल तैयार कर लिया है। नियम कहता है कि इस राशि के काम के लिए टेंडर की जरूरत नहीं है, बस इसी छूट को इस तिकड़ी ने अपनी तिजोरी भरने का जरिया बना लिया। फाइलों में विकास की गंगा बह रही है और धरातल पर काम का एक पत्थर तक नहीं हिला। जनता की गाढ़ी कमाई के इस बंदरबांट का खेल इतना तगड़ा है कि इसकी शिकायत भोपाल मुख्यालय तक पहुंचने के बाद भी ऊपर बैठे रसूखदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। रक्षक ही भक्षक बनकर पूरे सरकारी खजाने को डकारने में लगे हैं।

    ​नियम की आड़ में खुली डकैती

    ​नगर निगम के नियमों के मुताबिक 1 लाख रुपये तक के छोटे-मोटे कामों के लिए कोई टेंडर नहीं निकालना पड़ता। बस इसी लूपहोल का फायदा उठाकर बड़े कामों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है और चहेते ठेकेदारों की जेब में डाल दिया जाता है। इस पूरी सेटिंग में पारदर्शिता नाम की चीज को पूरी तरह से दफन कर दिया गया है ताकि जनता को कभी पता ही न चले कि उनके वार्ड के हिस्से का पैसा किसकी जेब में गया।

    ​मिलीभगत का अभेद्य त्रिकोणीय किला

    ​अमूमन ठेकेदार गड़बड़ी करता है तो पार्षद हल्ला मचाता है, लेकिन यहां तो गंगा ही उल्टी बह रही है। पार्षद, ठेकेदार और निगम के भ्रष्ट अधिकारियों ने मिलकर एक ऐसा सिंडिकेट बना लिया है जिसे भेद पाना नामुमकिन है। जब लूट के माल में तीनों का हिस्सा पहले से तय हो, तो फिर शिकायत कौन करे और कार्रवाई कौन करे। यह तिकड़ी मिलकर धड़ल्ले से फाइलों को पास करा रही है और जनता मूकदर्शक बनी हुई है।

    ​राजनैतिक धौंस के आगे सिस्टम पंगु

    ​इस पूरे संगठित भ्रष्टाचार के खिलाफ भोपाल तक शिकायतें भेजी गईं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। स्थानीय स्तर पर जो अधिकारी ईमानदारी दिखाना भी चाहते हैं, उन पर इन पार्षदों और बड़े रसूखदारों का ऐसा राजनैतिक दबाव है कि वे पूरी तरह पंगु हो चुके हैं। जांच की फाइलें धूल खा रही हैं और जनता के टैक्स का पैसा विकास के नाम पर सीधे इस भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ रहा है।

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