बैंक ऑफ इंडिया की अपील खारिज, डिवीजन बेंच ने कहा कि भुगतान रोकना पूरी तरह गलत

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने बैंक ऑफ इंडिया भोपाल द्वारा दायर की गई रिट अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया है कि यदि किसी बैंक खाते का शीर्षक या नाम बदल जाता है, तो सिर्फ इस तकनीकी आधार पर खाताधारक द्वारा पहले से जारी किए गए चेक अमान्य नहीं हो जाते हैं। इस मामले के विवरण के अनुसार, बैंक ऑफ इंडिया ने एक-एक लाख रुपए के दो चेक सिर्फ इसलिए बाउंस करके वापस लौटा दिए थे क्योंकि संबंधित बैंक खाते का नाम बदला जा चुका था। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि जब बैंक ने खाताधारक के खाते के नाम में बदलाव किया था, तब बैंक ने ग्राहक से उसके पुराने चेक वापस नहीं लिए थे और न ही उन पुराने चेकों को रिकॉर्ड में निरस्त किया गया था। ऐसी स्थिति में हाई कोर्ट ने माना कि केवल खाते का शीर्षक बदल जाने के बहाने चेक का भुगतान रोकना पूरी तरह से अनुचित और गलत है। अदालत ने बैंक की दलीलों को नामंजूर करते हुए उनकी अपील को खारिज कर दिया।
