नियमों की धज्जियां उड़ाकर शहरों को कबाड़ बनाने की प्रशासनिक सनक,एसीएस संजय दुबे के खिलाफ आक्रोश

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Newzo - News Editor 26 Views
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सरकारी खजाने को भरने के लिए सड़कों पर होर्डिंग जाल बिछाने की तैयारी, नागरिक मंच भड़का

जबलपुर। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने नगरीय निकायों में होर्डिंग और यूनिपोल की संख्या बढ़ाकर राजस्व वृद्धि करने के सरकारी आदेश पर गहरा विरोध जताया है। इस संबंध में मंच के पदाधिकारियों डॉ. पीजी नाजपांडे, रजत भार्गव, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, सुशीला कनौजिया और गीता पांडे ने 22 जून को नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे को एक औपचारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में हाल ही में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में संजय दुबे द्वारा दिए गए निर्देशों को आम जनता के लिए चिंताजनक और खतरनाक बताया गया है। मंच का स्पष्ट आरोप है कि बिना उचित प्रबंधन के विज्ञापन बोर्ड बढ़ाने से शहरों में यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी और सड़क दुर्घटनाओं में भारी बढ़ोतरी होगी। मंच ने कहा है की आय बढ़ाने के लिए सरकारी तंत्र का इस तरह से निर्देश जारी करना, जिससे आम जनता की जान खतरे में आए बहुत ही निराशाजनक है।

नियमों का उल्लंघन और जांच रिपोर्ट पर लापरवाही

​शहरों में पहले से लगे विज्ञापन बोर्ड आउटडोर विज्ञापन मीडिया नियम 2017 का खुलकर मखौल उड़ा रहे हैं। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच द्वारा पूर्व में की गई शिकायतों के बाद नगर निगम ने एक विशेष जांच समिति का गठन किया था। इस समिति ने पूरे मामले की गहराई से पड़ताल करके 13 जून 2025 को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी थी। अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि इस रिपोर्ट को आए हुए पूरा 1 वर्ष बीत चुका है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। प्रशासनिक सुस्ती के कारण अवैध होर्डिंग का जाल लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे शहर की सूरत बिगड़ रही है और नियमों को ताक पर रखकर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।

हादसे में मौत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

​सड़कों के किनारे लगे ये अनियंत्रित यूनिपोल सीधे तौर पर लोगों की जान के दुश्मन बन रहे हैं। जबलपुर में 18 जनवरी 2025 को इलाहाबाद बैंक के समीप एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना हुई थी, जिसमें एक नागरिक को अपनी जान गंवानी पड़ती थी। इस हादसे को हुए 1 वर्ष से अधिक का समय हो गया है, मगर पुलिस प्रशासन ने अब तक इस मामले में प्राथमिकी यानी एफआईआर दर्ज नहीं की है। इस लापरवाही के कारण हादसे की जवाबदेही तय नहीं हो सकी है और न ही पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। मंच ने मांग की है कि वर्तमान जमीनी हकीकत और जनता की सुरक्षा को देखते हुए विज्ञापन बढ़ाने के फैसले पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए, ताकि सड़कों को सुरक्षित बनाया जा सके।

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