
महिला की जान लेने वाले बाघ की भी मौत, डॉक्टरों की विशेष टीम ने किया शव परीक्षण
जबलपुर। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा बफर क्षेत्र के खेरवा टोला में रविवार तड़के करीब 3 बजे अपने घर के आंगन में सो रही 48 वर्षीय फूलबाई को मौत के घाट उतारने वाले और उसे बचाने आए दसैया व फुल्ला को गंभीर रूप से घायल करने वाले खूंखार बाघ की संदेहास्पद मौत का असली कारण अब स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ में हुए दूसरे पोस्टमार्टम की फॉरेंसिक रिपोर्ट से ही साफ हो सकेगा। इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के अधिकारी अनिल दशहरे दोपहर में ही फॉरेंसिक सेंटर पहुंचे, जहां एनटीसीए नागपुर और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय, सेंटर की डायरेक्टर डॉ. शोभा जावरे, डॉ. अभय सेंगर, डॉ. अमिता दुबे, डॉ. निधि राजपूत और विशेष आमंत्रित सदस्य डॉ. अमोल रोकड़े की उच्च स्तरीय कमेटी की सीधी निगरानी में मृत बाघ का दोबारा पीएम किया गया, जिसके बाद डुमना नेचर पार्क में एनटीसीए गाइडलाइंस के तहत करीब 8 वर्ष की उम्र वाले इस बीटी-9 बाघ का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
वन कर्मियों पर भड़का ग्रामीणों का गुस्सा
इस दर्दनाक हादसे के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश देखा गया। स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि बस्ती में खूंखार बाघ के घुसने की लगातार सूचना देने के बाद भी वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी समय पर मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे महिला की जान चली गई। इस लापरवाही से नाराज ग्रामीणों ने घटना स्थल पर पहुंची रेस्क्यू टीम को घेरकर उन पर अचानक पथराव कर दिया और सरकारी गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की।
रेंजर समेत कई कर्मचारी हुए घायल
ग्रामीणों द्वारा किए गए इस हिंसक हमले और मारपीट में पनपथा रेंजर प्रतीक श्रीवास्तव के सिर पर बेहद गंभीर चोट आई है। इसके साथ ही पतौर रेंजर अंजू वर्मा सहित मौके पर मौजूद कई अन्य वनकर्मी भी इस पथराव की चपेट में आकर बुरी तरह घायल हो गए। ग्रामीणों के बेकाबू होते गुस्से और कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन को तुरंत मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
बेहोश करते ही थम गईं बाघ की सांसें
वन विभाग के दावों के मुताबिक, महिला पर हमला करने के बाद घर में ही छिपे बैठे इस हिंसक बाघ को काबू में करने के लिए एक जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था। टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद बाघ को ट्रैंक्विलाइज यानी बेहोश किया था, लेकिन इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद बाघ ने दम तोड़ दिया। इस अप्रत्याशित मौत के बाद वरिष्ठ वन्यजीव अधिकारियों ने शव परीक्षण के साथ विभिन्न अंगों के सैंपल लेकर उन्हें गहन जांच के लिए सुरक्षित रख लिया है।
विसरा रिपोर्ट आने के बाद होगी कार्रवाई
शाम तक इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मुख्य कार्यालय नहीं भेजी जा सकी थी, जिसके चलते पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ भी अभी इस घटनाक्रम पर आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं। अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक लैब से विसरा और सैंपल्स की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की सही वजह सामने आएगी, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई तय की जाएगी।
