कलेक्टर के आदेशों की उड़ी धज्जियां, डीपीसी दफ्तर में चल रहा पोस्टिंग का खेल,सवालों से बच रहे डीपीसी योगेश शर्मा

जबलपुर। जिले में शिक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार की दीमक खोखला कर रही है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह द्वारा नाकारा बीआरसी और जन शिक्षकों को हटाए जाने के बाद अब डीपीसी कार्यालय ने नई नियुक्तियों के नाम पर अवैध वसूली की दुकान खोल ली है। नए शिक्षा सत्र के ठीक पहले चहेतों को मलाईदार पदों पर बैठाने के लिए मोटी रकम वसूली जा रही है। हद तो यह है कि नियम दरकिनार कर गणित और विज्ञान के शिक्षकों को जन शिक्षक बनाया जा रहा है जबकि ऐसा करना सख्त मना है। इस खुली लूट और धांधली के मुख्य जिम्मेदार जिला परियोजना समन्वयक डीपीसी योगेश शर्मा से जब जवाब मांगना चाहा तो उन्होंने फोन उठाना ही मुनासिब नहीं समझा। पैसों की चमक में अफसर बच्चों का भविष्य बर्बाद करने पर उतारू हैं।
विज्ञान और गणित के शिक्षक बनेंगे बाबू
शिक्षा विभाग के स्पष्ट नियम हैं कि किसी भी स्कूल के गणित और विज्ञान पढ़ाने वाले शिक्षकों को जन शिक्षक नहीं बनाया जाएगा। लेकिन डीपीसी दफ्तर में नियम नहीं बल्कि नोटों की गड्डियां बोल रही हैं। इन महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों को स्कूलों से निकालकर बाबूगिरी में धकेलने की पूरी बिसात बिछ चुकी है। पैसों के लालच में बैठे अधिकारी यह भूल गए हैं कि इन शिक्षकों के हटने से स्कूलों में विज्ञान और गणित कौन पढ़ाएगा। चहेतों को कुर्सी तक पहुंचाने के लिए एक ऐसी फर्जी सूची तैयार की जा रही है जिस पर जल्द ही बड़े अधिकारियों के हस्ताक्षर कराकर इसे वैध बनाने की साजिश चल रही है।
दबाव में पिस रहे प्राचार्य, शिक्षकों को रिलीव करने दबाव
इस भ्रष्ट सिस्टम का सबसे ज्यादा शिकार स्कूलों के प्राचार्य हो रहे हैं। डीपीसी कार्यालय से प्राचार्यों पर लगातार भारी दबाव डाला जा रहा है कि वे अपने स्कूलों के गणित और विज्ञान के शिक्षकों को तुरंत रिलीज करें। प्राचार्य जानते हैं कि यह पूरी तरह नियम विरुद्ध है इसलिए वे फिलहाल शिक्षकों को छोड़ने से कतरा रहे हैं। लेकिन अफसरों की धौंस और नौकरी के डर के कारण कोई भी प्राचार्य खुलकर इस धांधली की शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। ऊपर से लेकर नीचे तक फैले इस खौफ के माहौल ने पूरी शिक्षा प्रणाली को बंधक बना लिया है।
नए सत्र से पहले मची लूट
नया शिक्षण सत्र सिर पर है और स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बनाने के बजाय शिक्षकों में मलाईदार पोस्ट पाने की होड़ मची है। गणित और विज्ञान जैसे कठिन विषयों के कई शिक्षक क्लासरूम छोड़कर जन शिक्षक बनने के लिए डीपीसी दफ्तर की परिक्रमा कर रहे हैं। यह सब उन गरीब बच्चों के भविष्य के साथ सीधा धोखा है जो सरकारी स्कूलों के भरोसे हैं। शिक्षा विभाग के दलालों ने पूरी व्यवस्था को मंडी बना दिया है जहां पद बेचे जा रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई को दांव पर लगा दिया गया है।
कलेक्टर की मंशा पर पानी फेरता भ्रष्ट तंत्र
कुछ समय पहले कलेक्टर ने शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए सख्त कदम उठाते हुए नाकाबिल लोगों को बीआरसी और जन शिक्षक पद से हटाया था। लेकिन डीपीसी कार्यालय के भ्रष्ट तंत्र ने कलेक्टर के सुधार अभियान पर पानी फेर दिया है। योगेश शर्मा जैसे अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं और नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अब देखना है कि क्या प्रशासन इस खुली बगावत और भ्रष्टाचार पर लगाम कसते हुए इन अवैध नियुक्तियों को रद्द करेगा या फिर शिक्षा माफिया इसी तरह हावी रहेगा।
