
जबलपुर। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी की सिवनी स्थित 8 एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों ने लगातार 1500 दिनों तक बिना किसी ब्रेकडाउन के बिजली सप्लाई करने की एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि इन 8 लाइनों में 1976 में चालू 132 केवी सिवनी-चौरई और 1977 में बनी 132 केवी सिवनी-बालाघाट जैसी 50 साल पुरानी लाइनें शामिल हैं। इसके साथ ही 220 केवी सिवनी पावर ग्रिड-छिंदवाड़ा, 220 केवी सिवनी पावर ग्रिड-सिवनी के 2 सर्किट, 132 केवी इंटरकनेक्टर सिवनी के 2 सर्किट और 132 केवी सिवनी-पेंच लाइन भी बिना किसी खराबी के चल रही हैं। राज्य में ऐसी 593 लाइनें बिना रुके काम कर रही हैं। यह सफलता कंपनी के इंजीनियरों, कर्मचारियों और आउटसोर्स कर्मियों के कठिन परिश्रम का नतीजा है।
आधुनिक तकनीकों के दम पर मिली सफलता
सिवनी क्षेत्र की इन एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज लाइनों का लगातार चार वर्षों तक बिना किसी तकनीकी खराबी के चलना अपने आप में एक मिसाल है। इतने लंबे समय तक बिजली की सप्लाई में एक सेकंड के लिए भी बाधा न आना इस बात का सबूत है कि मेंटेनेंस का काम कितने बेहतरीन तरीके से किया जा रहा है। आमतौर पर पुरानी बिजली लाइनों में बार-बार खराबी आने या ट्रिपिंग की समस्या देखी जाती है, लेकिन पांच दशक पहले स्थापित हुई लाइनें भी आज नई तकनीक के बल पर पूरी क्षमता और मजबूती के साथ काम कर रही हैं।इस व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आधुनिक मशीनों और डिजिटल प्रणालियों का बड़े पैमाने पर सहारा लिया जा रहा है। बिजली लाइनों में किसी भी संभावित खराबी को पहले ही पकड़ने के लिए थर्मो-विजन कैमरों से जांच की जाती है। इसके अलावा आसमान से निगरानी के लिए ड्रोन सर्विलांस का उपयोग होता है, जबकि पूरे नेटवर्क पर नजर रखने के लिए स्काडा आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग और ऑनलाइन कंडीशन मॉनिटरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की मदद ली जा रही है। समय पर की जाने वाली रोकथाम और सही रखरखाव से लाइनों की कार्यक्षमता कई गुना बढ़ गई है।
जमीनी स्तर पर लगातार गश्त से टले बड़े हादसे
तकनीकी उपकरणों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की मुस्तैदी ने भी इस रिकॉर्ड को बनाने में अहम भूमिका निभाई है। बिजली विभाग की टीमें लगातार लाइनों की गश्त करती हैं और किसी भी खराबी की आशंका पैदा होने से पहले ही उसे ठीक कर देती हैं। खासकर मानसून का मौसम शुरू होने से पहले ही मेंटेनेंस का विशेष अभियान चलाया जाता है, जिससे तेज बारिश और हवाओं के दौरान भी ट्रांसमिशन लाइनें पूरी तरह सुरक्षित रहती हैं। इसके अलावा बिजली के तारों और खंभों के रास्ते में आने वाली पेड़-पौधों की डालियों और झाड़ियों की नियमित रूप से कटाई-छंटाई की जाती है। इससे तारों में स्पार्किंग या शार्ट सर्किट होने का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाता है। डिजिटल तकनीक और मैदानी कर्मचारियों के आपसी तालमेल की बदौलत ही पूरे सिवनी जिले में बिजली आपूर्ति का ढांचा पहले से काफी ज्यादा भरोसेमंद और मजबूत हुआ है, जिससे आम जनता को लगातार बिना किसी रुकावट के बिजली मिल पा रही है।
