
जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे जोन के कोटा रेल मंडल में 28 मई को दरा-कंवलपुरा रेलखंड पर निर्माणाधीन अंडरब्रिज की मिट्टी ढहने से 2 इंजीनियरों की दर्दनाक मौत का गंभीर मामला सामने आया था। इस बड़े हादसे के करीब 3 महीने बीतने के बावजूद कोटा मंडल रेल प्रबंधक अनिल कालरा की बुलाई गई मंगलवार की प्रेस वार्ता में संवेदनहीनता देखने को मिली। मंडल रेल प्रबंधक खुद इस वार्ता से नदारद रहे और उनकी जगह वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने पत्रकारों का सामना किया। इस दौरान रेलवे प्रशासन 55500 सोशल मीडिया फॉलोअर्स का जश्न मनाते हुए केक काटने और पत्रकारों को सम्मानित करने में व्यस्त रहा। जब सौरभ जैन से 2 इंजीनियरों की मौत की जांच रिपोर्ट और मांडलगढ़ स्टेशन मास्टर के कक्ष में छत से पानी टपकने को लेकर तीखे सवाल पूछे गए, तो उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था। रेलवे अफसरों ने दरा हादसे पर केवल मुख्यालय स्तर पर जांच चलने का रटा-रटाया बयान देकर पल्ला झाड़ लिया।
ड्राइंग दरकिनार कर जल्दबाजी में कराया गया निर्माण
दरा और कंवलपुरा स्टेशनों के बीच चल रहा कार्य पूरी तरह तकनीकी सुरक्षा नियमों के विपरीत था। ईद के राष्ट्रीय अवकाश वाले दिन भी कर्मचारियों से जोखिम भरा कार्य कराया जा रहा था। निर्धारित तकनीकी ड्राइंग को ताक पर रखकर अंडरब्रिज का ढांचा बिना पुख्ता मानकों के तैयार करने की अनुचित जल्दबाजी दिखाई गई। इसी भारी चूक के चलते अचानक मिट्टी का बड़ा टीला धंस गया, जिसने मौके पर मौजूद दोनों तकनीकी कर्मियों की जान ले ली। इस घटना के बाद मामले की लीपापोती करने के लिए मुख्यालय के 2 उच्चाधिकारियों और कोटा के अपर मंडल रेल प्रबंधक की एक संयुक्त 3 सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई थी। इस दर्दनाक हादसे को 8 दिन बाद पूरे 3 महीने पूरे हो जाएंगे, मगर जिम्मेदारों पर कार्रवाई तो दूर, आज तक इस कमेटी की प्राथमिक जांच रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की गई।
जवाबदेही से बचकर उत्सव मनाने में जुटा प्रशासन
रेलवे अधिकारियों का यह रवैया उनकी कार्यप्रणाली और प्रशासनिक गंभीरता पर सीधे सवाल खड़े करता है। खुद मंडल रेल प्रबंधक द्वारा संवाद का समय तय करने के बाद भी कार्यक्रम से दूरी बना लेना गैर-जिम्मेदाराना आचरण को दर्शाता है। पूरे घटनाक्रम में पीड़ितों के परिजनों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने या सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के बजाय अफसरों का ध्यान केवल इंटरनेट मीडिया पर अपनी वाहवाही लूटने तक सीमित रहा। वहीं दूसरी तरफ मानसून के दौरान मांडलगढ़ स्टेशन के मुख्य कार्यालय में छत से पानी के फव्वारे फूटने जैसी बदहाली पर वाणिज्य प्रबंधक ने पूरी तरह चुप्पी साध ली। कार्यस्थल की सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं से आंखें मूंदकर मंडल प्रशासन केवल आयोजनों में व्यस्त है, जिससे रेल कर्मचारियों और आमजन में गहरा असंतोष है।
