
जबलपुर। रांझी थाना क्षेत्र अंतर्गत बिलपुरा निवासी 24 वर्षीय छात्र सौरभ अहिरवार के साथ विशाखापट्टनम में कंप्यूटर ऑपरेटर का पद दिलाने के नाम पर 90 हजार रुपये की साइबर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। सितंबर 2025 में पीड़ित युवक का परिचय उसके साथी आदित्य के माध्यम से सुरादा आदिलक्ष्मी ज्योति नामक महिला से हुआ था। आरोपी महिला ने प्रतियोगी छात्र को प्रतिष्ठित स्थान पर रोजगार दिलाने का पक्का भरोसा दिया। इसके बाद आवेदन शुल्क, दस्तावेज सत्यापन तथा अन्य विभागीय प्रक्रियाओं का झांसा देकर विभिन्न किस्तों में कुल 90 हजार रुपये ऑनलाइन स्थानांतरित करवा लिए। संपूर्ण राशि बैंक खातों में प्राप्त करने के उपरांत महिला ने सौरभ के सभी संपर्क माध्यम बंद कर दिए। ठगी का अहसास होते ही थाने में शिकायत दर्ज हुई।
फर्जी औपचारिकताओं के बहाने किस्तों में वसूली रकम
नौकरी की चयन प्रक्रिया शुरू करने की बात कहकर शुरुआत में 30 हजार रुपये मांगे गए थे। राशि जमा होने के उपरांत जालसाज महिला ने युवक को भरोसे में लेने के लिए कॉल पर निरंतर प्रक्रिया प्रगति पर होने का नाटक जारी रखा। उसने बायोडाटा जांच, चिकित्सा परीक्षण, सुरक्षा निधि और पहचान पत्र जारी करने के अलग-अलग चरणों की काल्पनिक फीस निर्धारित कर दी। पीड़ित छात्र रोजगार पाने की जल्दी में बिना जांच-पड़ताल किए बताए गए डिजिटल वॉलेट और बैंक खातों में पैसे भेजता रहा। जब तयशुदा सीमा से अधिक समय बीत गया और जॉइनिंग लेटर का कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला, तब युवक को संदेह गहराने लगा।
खातों और मोबाइल विवरण से तलाश में पुलिस
नियुक्ति पत्र संबंधी जानकारी हासिल करने के लिए जब सौरभ ने फोन लगाया तो मोबाइल बंद आने लगा। संदेशों का उत्तर न मिलने और संपर्क के सारे रास्ते कट जाने पर पीड़ित ने कानूनी सहायता लेने का निर्णय लिया। स्थानीय थाना पुलिस ने बैंक लेन-देन की रसीदें, तकनीकी साक्ष्य और यूपीआई आईडी की प्रारंभिक पड़ताल पूरी कर धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। साइबर सेल की तकनीकी टीम अब संदेही महिला के उपयोग किए गए सिम कार्ड, लोकेशन ट्रैकिंग और वित्तीय खातों के डिजिटल पदचिह्नों का बारीकी से विश्लेषण कर उसकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर रही है।
