
जबलपुर। जबलपुर शहर में बिजली चोरी के प्रकरण दर्ज होने के बाद भी पेनाल्टी की राशि न चुकाने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ विद्युत विभाग ने सख्त कानूनी अभियान शुरू किया है। अधीक्षण अभियंता सिटी संजय अरोरा के अनुसार,जिन उपभोक्ताओं पर 5000 रुपये से अधिक की पेनाल्टी बकाया है, उनके बिजली कनेक्शन सीधे खंभे से तत्काल विच्छेदित करने के निर्देश कनिष्ठ एवं सहायक अभियंताओं को दिए गए हैं। विभाग को लगातार हो रहे राजस्व नुकसान को रोकने के लिए ऐसे पुराने मामलों को भी चिन्हित किया गया है, जहां लोक अदालत की छूट के बाद भी राशि नहीं भरी गई। वर्तमान वित्तीय वर्ष में पूर्व सूचना उपरांत 260 प्रकरण न्यायालय भेजे जा चुके हैं और अब 719 नए परिवाद दर्ज कराए जा रहे हैं।
डिफाल्टरों के खंभे से कटेंगे बिजली कनेक्शन
श्री अरोरा ने बताया कि विद्युत वितरण कंपनी द्वारा चलाए जा रहे इस सघन अभियान के तहत मैदानी अमले को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वसूली और विच्छेदन में किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरती जाए। शहर के समस्त वितरण केंद्रों के कनिष्ठ और सहायक अभियंता ऐसे परिसरों की सूची बनाकर जांच कर रहे हैं जहां बिजली चोरी का पंचनामा बनने के बावजूद निर्धारित पेनाल्टी जमा नहीं कराई गई। पूर्व में आयोजित त्रैमासिक लोक अदालत के मंच पर पेनाल्टी राशि में विशेष छूट और समझौते का अवसर मिलने के बाद भी संबंधित उपभोक्ताओं ने अपनी देय राशि नहीं चुकाई। विभाग का स्पष्ट मानना है कि अवैध बिजली उपयोग से वितरण ढांचे पर अत्यधिक लोड बढ़ता है और राजस्व की भारी क्षति होती है। इसी कारण कनेक्शन काटने के साथ-साथ अब सभी मामलों में विधिक प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
अदालत में दर्ज होंगे 719 नए प्रकरण
चालू सप्ताह में विशेष रणनीति के तहत जबलपुर शहर के सभी 5 संभागों में अधिकृत अधिवक्ताओं को नए मुकदमों की फाइलें सौंपी गई हैं। संभागवार आंकड़ों के अनुसार पूर्व संभाग में 200, उत्तर संभाग में 312, विजयनगर संभाग में 83, दक्षिण संभाग में 80 तथा पश्चिम संभाग में 44 प्रकरण चिन्हित किए गए हैं। इन कुल 719 मामलों को पूर्व क्षेत्र कंपनी के इम्पैनल्ड अधिवक्ताओं के माध्यम से विशेष न्यायालय के समक्ष परिवाद के रूप में विधिवत पंजीकृत कराया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक बिजली अधिनियम के तहत कानूनी वाद दायर होने के बाद उपभोक्ताओं को अदालत के समक्ष पेश होना पड़ेगा। इस सख्त कदम से पेनाल्टी दबाकर बैठे डिफाल्टरों की जवाबदेही तय होगी और बकाया राशि की शत-प्रतिशत वसूली संभव हो सकेगी।
