मनेरी सब-स्टेशन में एमडी ने जांची बिजली आपूर्ति की जमीनी हकीकत,स्टाफ से किया संवाद

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Newzo - News Editor 3 Views
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1जबलपुर। मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान-2026 के अंतर्गत मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध संचालक सुनील तिवारी ने शुक्रवार को जबलपुर स्थित 132 केवी मनेरी सबस्टेशन का विस्तृत स्थलीय मुआयना किया। इस विशेष दौरे में उन्होंने विद्युत प्रदाय तंत्र, रखरखाव कार्यों और उपभोक्ताओं को मिलने वाली बिजली की गुणवत्ता का गहन विश्लेषण किया। प्रबंध संचालक ने पारेषण क्षमता को सुदृढ़ बनाने के साथ निरंतर ऊर्जा प्रवाह बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने समूचे संयंत्र परिसर का भ्रमण कर तकनीकों की कार्यप्रणाली को बारीकी से देखा। इस मौके पर क्षेत्रीय तंत्र की कार्यकुशलता बढ़ाने और मैदानी स्तर पर तकनीकी रुकावटों को समाप्त करने के संबंध में विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

मैदानी कर्मचारियों की समस्याओं पर सीधा संवाद

​संयंत्र परिसर के निरीक्षण के दौरान प्रबंध संचालक ने आउटसोर्स कर्मियों के साथ आत्मीय बातचीत कर उनकी जमीनी कार्य परिस्थितियों और आवश्यकताओं को समझा। उन्होंने मैदानी दल के सदस्यों से सीधे सुझाव प्राप्त किए तथा जोखिम भरे कार्यों के दौरान तय सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सुनील तिवारी ने रेखांकित किया कि ग्रिड को चौबीसों घंटे सुचारू रखने में जमीनी अमले का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रबंधन इन कर्मचारियों के कल्याण और उनके समक्ष आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों के समाधान के प्रति पूरी संवेदनशीलता से कार्य कर रहा है। कार्यस्थल पर सुरक्षा साधनों की उपलब्धता और कर्मियों के अनुभव का सम्मान प्राथमिकता पर रहेगा।

लंबित प्रकरणों के त्वरित समाधान पर विशेष जोर

​शासन के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक शुक्रवार को फील्ड भ्रमण कर लोक सेवाओं के समयबद्ध प्रदाय की पड़ताल की जा रही है। प्रबंध संचालक ने सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई से प्राप्त लंबित प्रकरणों को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए तय समय-सीमा में निराकृत करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अमले को संवाद, समाधान, संवेदनशीलता और सादगी जैसे 4 प्रमुख आधार स्तंभों को कार्यसंस्कृति में शामिल करना होगा। नागरिकों की शिकायतों का पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण हल निकालना ही इस अभियान का मुख्य ध्येय है। निरीक्षण के अंत में पारेषण ग्रिड के संचालन और अनुरक्षण से जुड़े तकनीकी पहलुओं की समीक्षा कर आगामी रूपरेखा तय की गई।

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