अवैध कॉलोनी में मकान-प्लॉट लेने वालों पर भी शिकंजा कसने की पूरी तैयारी!

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Newzo - News Editor 82 Views
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अवैध कॉलोनी बनाने वालों पर 5 करोड़ का जुर्माना और 10 साल की सजा

जबलपुर। मध्य प्रदेश में अवैध और अनाधिकृत कॉलोनियों के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के उद्देश्य से नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मध्य प्रदेश कॉलोनी अधिनियम 2026 का नया ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इस प्रस्तावित कानून को जल्द ही सीनियर सेक्रेटरी कमेटी के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। इस नए नियम के प्रभाव में आने के बाद प्रदेश में न केवल अवैध कॉलोनी काटने वाले डेवलपर्स पर कड़ी कार्रवाई होगी, बल्कि इसमें लापरवाही बरतने वाले सरकारी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाएगी। यह सख्त अधिनियम भोपाल, महू, ग्वालियर, जबलपुर सहित प्रदेश के सभी 7 कैंटोनमेंट क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा, ताकि अवैध निर्माणों पर नकेल कसी जा सके।

कॉलोनाइजरों के लिए कड़े नियम और कठोर दंड के प्रावधान

​नए ड्राफ्ट के प्रावधानों के तहत अब किसी भी कॉलोनाइजर को कॉलोनी काटने के 5 साल के भीतर सड़क, पानी, बिजली और सीवेज जैसी सभी आंतरिक विकास सुविधाएं अनिवार्य रूप से पूरी करनी होंगी। विशेष परिस्थितियों में नगर निगम और टीएनसीपी से अधिकतम 2 साल का अतिरिक्त समय मिल सकेगा। यदि कोई कॉलोनाइजर अनुमति मिलने के 1 साल के भीतर काम शुरू नहीं करता है, तो उसका लाइसेंस तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा। अवैध कॉलोनी की परिभाषा को विस्तृत करते हुए अब शासकीय भूमि, हाउसिंग बोर्ड की जमीन, विकास योजना, पार्क, खेल मैदान, पुरातात्विक स्थल, सांस्कृतिक विरासत, नदी-नाले और सड़क मार्ग की अधिसूचित जमीन पर बनी कॉलोनियों को अवैध माना जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर 10 साल तक की जेल और 5 करोड़ रुपए तक के भारी जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।

अवैध कॉलोनी में मकान लेने वालों पर बोझ

​अवैध कॉलोनियों को रोकने के लिए वार्ड प्रभारियों से लेकर कलेक्टर तक की जिम्मेदारी तय की जाएगी। यदि शिकायत के बाद भी पुलिस कार्रवाई नहीं करती है, तो संबंधित पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिरेगी। विभाग ने अवैध निर्माण हटाने के लिए 15 दिन की समय सीमा तय की है, जिसके बाद सरकार स्वयं एक्शन लेगी। वहीं वैध कॉलोनाइजरों को सभी मंजूरियां 45 दिन के भीतर मिलेंगी। यदि कोई व्यक्ति किसी अनाधिकृत कॉलोनी में मकान या प्लॉट खरीदता है, तो उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। ऐसी कॉलोनियों में आंतरिक विकास कार्यों की 50 प्रतिशत राशि वहां रहने वाले निवासियों को स्वयं देनी होगी। शेष 50 प्रतिशत राशि कॉलोनाइजर की बैंक राशि और प्रॉपर्टी जब्त करके वसूली जाएगी।

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