मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के स्थापना दिवस पर गूंजा जबलपुर का नाम, पाठ्यक्रम विकास और आधुनिक शिक्षा सामग्री के प्रणेता हुए पुरस्कृत

जबलपुर। मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के 56वें स्थापना दिवस समारोह में उच्च शिक्षा क्षेत्र की बड़ी विभूतियों को सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल ने की। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन एवं आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस, शासकीय महाकौशल कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, जबलपुर के प्राचार्य प्रो. अलकेश चतुर्वेदी को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, पाठ्यक्रम विकास तथा उच्च शिक्षा के लिए पाठ्यपुस्तक एवं संदर्भ ग्रंथों के निर्माण में उनके उल्लेखनीय योगदान हेतु विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
उच्च शिक्षा में बदलाव के लिए मिला बड़ा सम्मान
प्रो. अलकेश चतुर्वेदी वर्तमान में मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक स्थायी समिति, राज्य शिक्षा केन्द्र के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वह विद्यालयी और उच्च शिक्षा स्तर की पाठ्यपुस्तकों, पाठ्यक्रमों और संदर्भ ग्रंथों के निर्माण में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके कुशल मार्गदर्शन और नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा, बहुविषयक अध्ययन, कौशल विकास तथा रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर आधारित महत्वपूर्ण शैक्षणिक सामग्री तैयार की जा रही है। इस विशेष समारोह में अकादमी द्वारा प्रकाशित प्रगति पथ ब्रोशर एवं द्विमासिक पत्रिका रचना का विमोचन भी गरिमामय तरीके से किया गया। इस ऐतिहासिक शैक्षणिक अवसर पर प्रदेश के अनेक विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्रख्यात शिक्षाविद, साहित्यकार एवं लेखक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
आधुनिक शैक्षणिक आवश्यकताओं और भारतीय ज्ञान का अनूठा समन्वय
सम्मान ग्रहण करने के बाद प्रो. अलकेश चतुर्वेदी ने इस गौरव को शिक्षा जगत से जुड़े सभी विद्वानों, लेखकों एवं विषय विशेषज्ञों के सामूहिक प्रयासों का प्रतिफल बताया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक समय की शैक्षणिक आवश्यकताओं के आपसी समन्वय का एक बेहद सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। इस नीति के माध्यम से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव हो पा रहा है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों ने प्रो. चतुर्वेदी के कार्यों की सराहना की और इसे राज्य के गौरव को बढ़ाने वाला कदम बताया। शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे इन बदलावों से आने वाले समय में विद्यार्थियों को नए अवसर मिलेंगे।
