शिकायतकर्ता से ही मांग रहे सबूत, मेडिकल कॉलेज के आयुष्मान घोटाले में ईओडब्ल्यू का रवैया निराशाजनक

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Newzo - News Editor 82 Views
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पुलिस अधीक्षक को सौंपी थी लिखित शिकायत, अब तक नतीजे शून्य,स्वास्थ्य योजना में भ्रष्टाचार के आरोपों से हड़कंप, पर जिम्मेदार तंत्र बेपरवाह

जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में सामने आए कथित आयुष्मान घोटाले की जांच अब तक शुरू नहीं हो सकी है। इस मामले में शिकायतकर्ता उमेश कुमार ने लगभग 2 महीने पहले आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू के पुलिस अधीक्षक को एक लिखित शिकायत सौंपी थी। इस शिकायत में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और अनियमितता होने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसके साथ ही दोषियों को चिन्हित कर उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई थी। शिकायत दर्ज हुए 2 महीने का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन ईओडब्ल्यू की ओर से अब तक इस दिशा में कोई भी प्रारंभिक कदम नहीं उठाया गया है। जांच प्रक्रिया आगे न बढ़ने के कारण अब जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली और उसकी भूमिका पर लगातार गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

​जांच के लिए सबूत मांगने पर असमंजस की स्थिति

​शिकायतकर्ता उमेश कुमार का कहना है कि जब वे इस मामले की लिखित शिकायत लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के कार्यालय पहुंचे थे, तब वहां मौजूद अधिकारियों ने उनसे इस घोटाले से जुड़े प्रत्यक्ष सबूत और प्रमाण पेश करने को कहा था। अधिकारियों का तर्क था कि बिना किसी पुख्ता प्रमाण के शिकायत पर सीधे कार्रवाई करना संभव नहीं है। इस बात पर शिकायतकर्ता ने कड़ी आपत्ति जताई है कि यदि सारे साक्ष्य और सबूत जुटाने का काम एक आम नागरिक को ही करना पड़ेगा, तो फिर इतनी बड़ी सरकारी जांच एजेंसियों और उनके पास मौजूद तंत्र का क्या औचित्य रह जाएगा। किसी भी शिकायत के मिलने के बाद उसकी सत्यता का पता लगाने के लिए शुरुआती जांच को आगे बढ़ाना पूरी तरह से संबंधित विभाग और जांच एजेंसी का ही मुख्य दायित्व होता है।

​मेडिकल कॉलेज प्रशासन और विभाग साधे हुए है चुप्पी

​इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इतने गंभीर आरोप लगने के बाद भी संबंधित पक्षों में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की तरफ से अब तक इस मामले में कोई भी आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान जारी नहीं किया गया है। दूसरी तरफ जिस नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर आयुष्मान योजना में धांधली करने के आरोप लगे हैं, उसकी ओर से भी स्थिति स्पष्ट करने के लिए कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विभाग की इस चुप्पी और सुस्ती के कारण शिकायतकर्ता को न्याय मिलने की उम्मीद कम होती दिख रही है। उनका मानना है कि यदि जांच एजेंसियों का रवैया ऐसा ही रहा, तो भविष्य में कोई भी नागरिक व्यवस्था में सुधार के लिए भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने और शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा।

​कार्रवाई न होने पर उच्च स्तर पर जाएंगे शिकायतकर्ता

​शिकायतकर्ता उमेश कुमार ने साफ कर दिया है कि वे इस मामले को यहीं पर ठंडे बस्ते में नहीं जाने देंगे। यदि आने वाले कुछ दिनों के भीतर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने इस कथित आयुष्मान घोटाले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच शुरू नहीं की, तो वे इस पूरे मामले को लेकर शासन और प्रशासन के उच्च अधिकारियों के पास जाएंगे। उनका कहना है कि आयुष्मान भारत योजना सीधे तौर पर गरीब और जरूरतमंद मरीजों के स्वास्थ्य से जुड़ी एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण योजना है। ऐसी जनहित की योजना में किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की आशंका होना एक गंभीर अपराध है, जिसकी पूरी निष्पक्षता के साथ गहराई से जांच होना बेहद जरूरी है।

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