
जबलपुर। मध्य प्रदेश के बिजली संविदा कर्मचारियों के संघर्ष और कानूनी प्रयासों को आखिरकार बड़ी सफलता मिल गई है। यूनाइटेड फोरम पावर एम्पलाइज संगठन के पूर्व क्षेत्र कंपनी संयोजक एसके पचौरी द्वारा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने प्रबंधन को 60 दिन के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था, लेकिन तय समय सीमा में फैसला नहीं आने पर श्री पचोरी ने कोर्ट में अवमानना का केस दर्ज कराया। इस कानूनी दबाव के चलते आखिरकार प्रबंधन को कर्मचारियों की मांग माननी पड़ी। यूनाइटेड फोरम फॉर पावर एम्पलाई संगठन की इसी लगातार सक्रियता और मजबूत पैरवी के कारण प्रदेश के 6500 बिजली संविदाकर्मियों के लिए नियमित होने का रास्ता साफ हो गया है, जिसका संगठन ने स्वागत करते हुए प्रबंधन को धन्यवाद ज्ञापित किया है। ऊर्जा विभाग ने इसके लिए संविदा आधार पर कार्यरत कार्मिकों की समकक्ष नियमित पदों पर नवीन नियुक्ति योजना-2026 लागू की है।
संघर्ष की जीत से खुली नियमितीकरण की राह
एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनियों और मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी में संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए यह बड़ी राहत की खबर है। इस योजना के दायरे में लाइन अटेंडेंट, टेस्टिंग अटेंडेंट, जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर शामिल हैं। हालांकि मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी को इस योजना के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इन सभी विभागों के पात्र कर्मचारियों को अब नियमित होने का सुनहरा अवसर मिलने जा रहा है।
परीक्षा पास कर बनेंगे स्थायी कर्मचारी
ऊर्जा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार पात्र संविदा कर्मचारियों को नियमित रिक्त पदों पर नई नियुक्ति पाने के लिए एक विशेष परीक्षा पास करनी होगी। इस परीक्षा में कर्मचारियों को वरिष्ठता के आधार पर बोनस अंक दिए जाएंगे जिसके बाद अंतिम मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी। विशेष बात यह है कि इस परीक्षा में बैठने के लिए कर्मचारियों को केवल एक ही मौका मिलेगा। आदेश के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संबंधित कंपनियों के प्रबंध संचालकों को सौंपी गई है।
नियमित होने के लिए यह योग्यता जरूरी
इस परीक्षा में आवेदन करने के लिए संविदा कर्मचारियों को योजना की स्वीकृति तिथि तक संबंधित कंपनी में कम से कम 2 साल की संविदा सेवा पूरी करनी होगी। दो अनुबंधों के बीच के अंतराल को सेवा में व्यवधान नहीं माना जाएगा, हालांकि वह अनुभव अवधि में नहीं जुड़ेगा। पुन: संविदा पाने वालों के अनुभव में से सेवा से अलग रहने की अवधि घटाई जाएगी और अनुभव प्रमाण पत्र कार्यपालन अभियंता या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा ही जारी किया जाएगा।
