बच्चे ढूंढ रहे अपने प्रिंसिपल को, साहब डीईओ ऑफिस में कर रहे बाबूगिरी

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Newzo - News Editor 53 Views
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रांझी के गणेशगंज स्कूल का भविष्य लापरवाही की भेंट चढ़ा,नए जिला शिक्षा अधिकारी का मौन भी कटघरे में

जबलपुर। रांझी के गणेशगंज स्कूल में इन दिनों भारी अव्यवस्था व्याप्त है। स्कूल के विद्यार्थी और उनके पालक अपने प्राचार्य की तलाश में भटक रहे हैं, जबकि वहां के नियुक्त प्राचार्य आर के वधान जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में बाबूगिरी कर रहे हैं। शिक्षा विभाग द्वारा आर के वधान को कार्यमुक्त करने का आदेश जारी होने के बावजूद, उन्हें रिलीव नहीं किया जा रहा है। वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी गौतम बर्वे की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि उनके आने के बाद भी वधान अपनी कुर्सी से चिपके हुए हैं। एडमिशन का समय होने के कारण स्कूल के विद्यार्थी, अभिभावक और क्षेत्र से संबद्ध निजी स्कूलों के संचालक परेशान हैं। इस प्रशासनिक मनमानी ने शिक्षा विभाग की छवि को धूमिल कर दिया है, जिसके चलते अब कलेक्टर और भोपाल तक शिकायत भेजने की तैयारी की जा रही है।

​आदेश होने के बाद भी कुर्सी से चिपके प्राचार्य

​शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। गणेशगंज स्कूल के प्राचार्य आर के वधान का स्थानांतरण ऑर्डर जारी होने के बावजूद वे जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमे हुए हैं। वहां वे लिपिकीय कार्य यानी बाबूगिरी कर रहे हैं, जिससे स्कूल की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सबसे हैरानी की बात यह है कि विभागीय आदेशों का पालन कराने की जिम्मेदारी जिन जिला शिक्षा अधिकारी गौतम बर्वे के कंधों पर है, वे भी इस मामले में मूकदर्शक बने हुए हैं। उनके स्तर से प्राचार्य को कार्यमुक्त नहीं किया जाना प्रशासनिक लापरवाही और मनमानी का जीता-जागता उदाहरण है। विभागीय गलियारों में यह चर्चा जोर-शोर से है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है जो एक प्राचार्य को स्कूल नहीं भेजा जा रहा है।

​एडमिशन के दौर में बच्चों का भविष्य संकट में

​इस समय शैक्षणिक सत्र में नए प्रवेश का महत्वपूर्ण दौर चल रहा है। गणेशगंज स्कूल एक प्रमुख संस्थान है और क्षेत्र के कई निजी स्कूल इससे संबद्ध हैं। प्राचार्य की अनुपस्थिति में न केवल बच्चों के एडमिशन का काम रुका हुआ है, बल्कि निजी स्कूलों के संचालक भी अपने जरूरी कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। पालक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं और कार्यालयों में भटकने को मजबूर हैं। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों को इस बात का तनिक भी एहसास नहीं है कि उनकी इस सुस्ती से कितने परिवारों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। स्कूल में प्रशासनिक मुखिया न होने के कारण रोजमर्रा के काम भी ठप पड़े हैं, जिससे पूरी शिक्षा व्यवस्था अराजकता की ओर बढ़ रही है।

​अब कलेक्टर और भोपाल तक गूंजेगी शिकायत

​शिक्षा विभाग की इस मनमानी और कार्यशैली के खिलाफ अब विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। स्थानीय लोगों, अभिभावकों और निजी स्कूल संचालकों ने ठान लिया है कि वे अब चुप नहीं बैठेंगे। इस पूरे मामले की शिकायत जल्द ही जबलपुर कलेक्टर से की जाएगी। इसके साथ ही, इस मनमानी पर लगाम लगाने के लिए भोपाल स्थित उच्च अधिकारियों को भी एक विस्तृत शिकायत भेजी जा रही है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इन जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो विभाग की साख पूरी तरह खत्म हो जाएगी। शिक्षा जगत में फैल रही यह निराशा और प्राचार्य के नहीं जाने के पीछे के संदिग्ध कारणों की निष्पक्ष जांच की मांग अब जोर पकड़ने लगी है ताकि स्कूल में जल्द से जल्द व्यवस्था बहाल हो सके।

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