
जबलपुर। भोपाल-जबलपुर नेशनल हाईवे 45 पर स्थित शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य आम जनता के लिए किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है। करीब 7 माह पूर्व नवंबर में इस ब्रिज का एक हिस्सा मिट्टी धंसने से क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद फरवरी 2026 में इसकी सपोर्टिंग वाल भी टूट गई। एमपीआरडीसी की देखरेख में बांगड़ कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा 450 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित इस 55 किलोमीटर के मार्ग में शहपुरा आरओबी भी शामिल है, जो अब पूरी तरह लापरवाही की कहानी बयां कर रहा है। मानसून के पहले काम पूरा करने के दावों के बावजूद स्थिति जस की तस है और अब इसे जनता के लिए खुलने में करीब 1 साल का अतिरिक्त समय लगेगा। पुनर्निर्माण का यह खर्च अब 15 करोड़ रुपए से अधिक पहुंच चुका है, जिसका खामियाजा करदाताओं की गाढ़ी कमाई के रूप में जनता भुगत रही है।
अधिकारी और कंपनी की लापरवाही से बढ़ी परेशानी
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने पुरानी निर्माण प्रक्रिया को पूरी तरह खारिज कर दिया है। मंत्रालय के एक्सपर्ट्स की सलाह पर अब नए सिरे से ब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है। ब्रिज के अप्रोच वाले हिस्से को हटाकर बेस तैयार किया जा रहा है। 400 मीटर के इस हिस्से को साइड और मिडिल पिलर सिस्टम से तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। एमपीआरडीसी के मुख्यालय भोपाल में अब हर सप्ताह इस कार्य की समीक्षा रिपोर्ट भेजी जाएगी। निर्माण कार्य में हो रही देरी और भ्रष्टाचार के कारण अब इस मार्ग पर चलने वाले हजारों वाहनों को पूरे मानसून सीजन में डायवर्टेड रूट का उपयोग करना पड़ेगा।
टोल वसूली जारी पर सफर बना संग्राम
शहपुरा कृषि उपज मंडी से गुजरने वाले डायवर्टेड रूट से प्रतिदिन 4 से 5 हजार कारें और बड़ी संख्या में हैवी व्हीकल्स आवागमन कर रहे हैं। जबलपुर से भोपाल, इंदौर, उज्जैन और देवास जाने वाले राहगीर इसी मार्ग से होकर गुजर रहे हैं, लेकिन यहां की बदहाल स्थिति से वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बड़ी बात यह है कि डायवर्टेड रूट होने के बावजूद शहपुरा टोल पर नियम विरुद्ध तरीके से टोल वसूली का सिलसिला निरंतर जारी है। फिलहाल अधिकांश वाहन पाटन होकर शहपुरा और वहां से भोपाल हाईवे तक पहुंचने को मजबूर हैं। सड़क की जर्जर हालत और निर्माण की धीमी गति से शासन-प्रशासन के दावों की पोल खुल रही है।
