
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में प्रमोशन में आरक्षण के मामले को लेकर आज एक बार फिर लंबी बहस के बाद सुनवाई को टाल दिया गया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई शुरू होते ही राज्य सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता ने महाधिवक्ता के उपस्थित न होने का कारण बताते हुए स्थगन का अनुरोध किया जिसे कोर्ट ने मान लिया है। मामले में सपाक्स संस्था ने अपना पक्ष रखते हुए कोर्ट से यह मांग की है कि जब तक विवाद का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता तब तक सरकार कोई भी प्रमोशन आदेश जारी न करे। संस्था ने विधानसभा सचिवालय में निकले 15 प्रमोशन आदेशों पर भी कड़ा विरोध जताया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस पुराने लंबित मामले का जल्द निराकरण किया जाएगा और महाधिवक्ता से पुरानी मौखिक अंडरटेकिंग पर जवाब मांगा है।
सरकारी वकीलों की अनुपस्थिति से टली अहम सुनवाई
राज्य सरकार ने सुनवाई को आगे बढ़ाने के लिए महाधिवक्ता की गैरमौजूदगी को आधार बनाया। इस पर सपाक्स संस्था ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार की तरफ से पहले यह मौखिक भरोसा दिलाया गया था कि नई प्रमोशन नीति पर फिलहाल कोई काम नहीं होगा। संस्था का कहना है कि सरकार का यह वादा अब टूट रहा है क्योंकि विधानसभा सचिवालय में 15 लोगों को प्रमोशन दे दिया गया है। कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सरकार से उस पुरानी मौखिक अंडरटेकिंग को लेकर स्पष्टीकरण तलब किया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस स्पष्टीकरण के बाद ही आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हो सकेगी। कोर्ट ने सभी पक्षों को संयम बरतने को कहा है।
कोर्ट ने कहा,सरकार अपनी नीति स्पष्ट करे
सपाक्स की दलील है कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है इसलिए किसी भी विभाग में पदोन्नति की प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया ने इस बात पर जोर दिया कि प्रमोशन में आरक्षण जैसा संवेदनशील मुद्दा बहुत समय से लंबित है और अब इसे ज्यादा नहीं खींचा जा सकता। उन्होंने संकेत दिए हैं कि आने वाली तारीखों में इस पूरे विवाद पर फाइनल सुनवाई की जाएगी ताकि हजारों कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित हो सके। फिलहाल पूरी प्रशासनिक व्यवस्था और राज्य के कर्मचारी वर्ग की नजरें अब हाईकोर्ट की अगली तारीख पर टिकी हैं। कोर्ट के रुख से स्पष्ट है कि सरकार को जल्द ही अपनी नीति और प्रमोशन के फैसलों को लेकर ठोस स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
